अगर केंद्र और राज्य सरकार टैक्स न लें तो कितनी होगी पेट्रोल की कीमत?

Tax On Fuel In India: कभी आपने सोचा है कि अगर भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स न लें सिर्फ अपने हुए खर्च को वसूलें और कोई फायदा न कमाएं तो आम जनता को पेट्रोल-डीजल कितने रुपए में मिलेगा? वैसे यह ख्याल सुनने में अच्छा लगता है लेकिन ऐसा कभी होने नहीं वाला लेकिन फिर भी अपन ये जान लेते हैं कि सरकारें पेट्रोल-डीजल पर हमसे कितना टैक्स वसूलती हैं.

भारत में तीन प्रमुख कंपनियां हैं जो क्रूड ऑयल खरीदकर उन्हें ईंधन में बदलकर पेट्रोल स्टेशन तक पहुंचाने का काम करती हैं. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) भारत पेट्रोलियम लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) इन तीनों की ऑयल मार्केट में 90% हिस्सेदारी है. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल विदेशों से खरीदता है.

एक बैरल में कच्चे तेल 159 लीटर होता है वर्तमान में क्रूड ऑयल की तुलना से कीमत सेट करें तो लगभग 35 से 40 रुपए प्रति लीटर और ये सिर्फ शुरुआती लागत है जब कच्चा तेल भारत लाया जाता है. इसके बाद रिफाइनरी का खर्च, ट्रांसपोर्ट और बीमा के चलते इसकी कीमत 3 से 5 रुपए और बढ़ जाती है. यह वह कीमत होती है जिसे Refinery Transfer Price’ कहा जाता है. ये वह कीमत होती है जिस पर रिफाइनरी से तेल कंपनियां तैयार ईंधन को आगे डिस्ट्रीब्यूशन के लिए ट्रांसफर करती हैं.

इसके पास तेल कंपनियां अपना मार्जिन जोड़ती हैं जो 2-3 रुपए प्रति लीटर के आसपास होता है और इसके बाद शुरू होता है टैक्स का खेल.

पेट्रोल-डीजल की कीमत में कितना टैक्स?

पेट्रोल और डीजल में कई टैक्स लगते हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार की तरफ से एक्साइज में हुई ताजा कटौती से पहले तक पेट्रोल पर करीब 19-20 प्रति लीटर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी और डीजल पर 15-16 रुपये प्रति लीटर तक टैक्स लगता था. इसमें बेसिक एक्साइज ड्यूटी, स्पेशल एडीशनल एक्साइज ड्यूटी और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल थे. यह आमतौर पर पेट्रोल पंप की कीमत का लगभग 20 से 25 परसेंट तक होता है. 

वहीं राज्यों की हिस्सेदारी 20-30 परसेंट तक होती है. महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य तो सबसे ज्यादा वैट वसूलते हैं. दिल्ली में थोड़ा कम वैट वसूला जाता है.

सामान्य तौर पर, कच्चे तेल की लागत, रिफाइनिंग और माल ढुलाई लागत पेट्रोल के रिटेल प्राइस का करीब 35-45 परसेंट होती है. सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी करीब 20-25 परसेंट होती है, जबकि राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले वैट को शामिल करें तो 20-30 परसेंट और टैक्स बढ़ जाता है. डीलर कमीशन और ओएमसी मार्जिन मिलाकर लगभग 5-8 परसेंट के बीच होते हैं. इस तरह से देखें तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 40-55% तो टैक्स ही लग जाता है.

इस रिपोर्ट में एक उदाहरण देते हुए बताया गया है कि अगर कच्चा तेल 40 रुपये और इसकी रिफाइनिंग और माल ढुलाई की लागत 5 रुपये, तेल कंपनियों का मार्जिन 3 रुपये, एक्साइज ड्यूटी 20 रुपये, वैट 25 रुपये और डीलर कमीशन 4 रुपये मान लें तो आम लोगों को पेट्रोल के दाम 97 रुपये लीटर चुकाने पड़ेंगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *