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दिल्ली दंगो के आरोपी ताहिर हुसैन को पैरोल कैसे मिल गई?

How Tahir Hussain Got Bail: दिल्ली दंगे का आरोपी ताहिर हुसैन अब सड़कों में घूम घूम कर AIMIM के लिए वोट मांगेगा क्योंकी सुप्रीम कोर्ट ने IB अफसर की बेरहमी से हत्या करने के आरोपी को पैरोलग्रांट कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपी Tahir Hussain को मंगलवार को दिल्ली चुनाव प्रचार के लिए 6 दिन की सशर्त कस्टडी पैरोल दी है। ताहिर इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से मुस्तफाबाद सीट से कैंडिडेट है।

ताहिर को बेल मिली मगर किस कीमत पर ?

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘ताहिर हुसैन को 29 जनवरी से 3 फरवरी तक दिन के समय चुनाव प्रचार के लिए रिहा किया जाएगा। उसे रात में जेल लौटना होगा।’ कोर्ट ने ताहिर हुसैन को सुरक्षा खर्च के तौर पर हर दिन 2.47 लाख रुपए देने को कहा। इस तरह उसे 6 दिन में 14.82 लाख रुपए देने होंगे।

जमानत नहीं पैरोल मिली है

दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को मुस्तफाबाद सीट से नामांकन भरने के लिए ताहिर को कस्टडी पैरोल दी थी। इस दौरान चुनाव प्रचार के लिए जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। ताहिर की याचिका पर दो जजों की बेंच जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस पंकज मित्तल ने 20 और 22 जनवरी को सुनवाई की थी। 22 जनवरी को ताहिर की जमानत पर दोनों जजों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। मामले को तीन जजों की बेंच के पास भेजने का फैसला किया गया।

जमानत क्यों नहीं दी ?

जस्टिस मित्तल ने कहा कि अगर चुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत दी तो इससे भानुमती का पिटारा खुल जाएगा। पूरे साल चुनाव होते हैं। हर कैदी दलील लेकर आएगा कि उसे चुनाव लड़ने के लिए जमानत दी जाए। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा था कि आरोपी मार्च 2020 से जेल में है। उसे प्रचार के लिए जमानत देनी चाहिए।

जेल से चुनाव लड़ने पर रोक लगे

इस मामले में 20 जनवरी को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जेल में बंद सभी लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए। ताहिर की ओर से पेश एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल ने 21 जनवरी को कोर्ट से सुनवाई का अनुरोध किया था।

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