न्याज़िया मंथन। सब कुछ होते हुए भी हम जीवन का आनंद नहीं ले पाते कभी […]
Tag: आत्ममंथन
ज़िंदगी क्या सच में एक पहेली है!
न्याज़िया मंथन। ज़िंदगी क्या सच में एक पहेली है जिसका जवाब ढूंढना बहुत मुश्किल है,जैसे […]
आत्ममंथन: हम सबमें है कुछ ख़ास, फिर किस बात की होड़
Atmamanthan In Hindi | न्याज़िया बेगम: आज जाने हम किस बनावटी दुनिया में जी रहे […]
क्यों हमें दुनिया अच्छी नहीं लगती
मंथन। आपको नहीं लगता ये दुनिया बहुत खूबसूरत है बस हमारे पास इसे देखने का […]
हम क्या कर सकते हैं ?हमें तो कुछ नहीं आता !
न्याज़ियामंथन। अक्सर जब हम बेवक़्त या मजबूरी के चलते काम की तलाश में निकलते हैं […]
आत्ममंथन: क्यों बहोत अच्छे की चाह में हम बुरा चुन लेते हैं
Atmamanthan In Hindi | न्याज़िया बेगम: फैसले लेने में जल्द बाज़ी न करें मगर बहुत […]
अच्छा होगा कि हम बर्दाश्त करना सीखे, धैर्य से काम लें
न्याज़ियामंथन। आपको क्या लगता है क्या ज़्यादा मुश्किल है ? किसी की बात का पलट […]
क्या वास्तव में औरत कंमजोर है!
न्याज़ियामंथन। औरत कौन होती है वो लड़की जिसकी क़ुव्वत क़ुदरत धीरे-धीरे उसे बता देती है […]
‘नमन्ति फलनो वृक्षा, नमन्ति गुणतोजना, शुष्क कास्ठानि मुर्खाश्च नमति कदाचन’
न्याज़ियामंथन। क्या आपके पास भी कुछ लोग ऐसे हैं जो आपसे बहुत बड़े हैं उम्र […]
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।
न्याज़ियामंथन। क्या ये मानना मुश्किल है कि हममें भी कोई कमी है ? हज़ार ग़लतिया […]
