Magh Mela prayagraj: संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले में आध्यात्मिक शांति के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी टकराव खड़ा हो गया है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें एक नया नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में न केवल उनकी संस्था को दी गई सुविधाएं रद्द करने की चेतावनी दी गई है, बल्कि मेले में उनके प्रवेश पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगाने का सवाल भी पूछा गया है।
मौनी अमावस्या पर नियमों के उल्लंघन का आरोप
विवाद की मुख्य वजह मौनी अमावस्या के दिन हुई एक घटना है। मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, उस दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुलों और रास्तों पर वाहनों का प्रवेश वर्जित कर केवल पैदल चलने की अनुमति दी थी। आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ बग्घी पर सवार होकर ‘रिजर्व पुल संख्या 2’ पर पहुँचे और वहां लगे बैरियर को तोड़ते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हो गए।
इस कृत्य पर प्रशासन शख्त , दिया नोटिस | Magh Mela prayagraj
प्रशासन का कहना है कि इस कृत्य से न केवल भीड़ प्रबंधन में लगे सुरक्षाकर्मियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, बल्कि वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने की भी पूरी आशंका थी। नोटिस में स्पष्ट पूछा गया है कि जन सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए क्यों न उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भविष्य के मेलों से निष्कासित कर दिया जाए।
शंकराचार्य पद की दावेदारी पर भी रार | Magh Mela prayagraj
यह टकराव केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं है। इससे पहले प्रशासन ने स्वामी जी को एक और नोटिस भेजा था, जो उनके ‘ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य’ के तौर पर पदनाम के उपयोग से जुड़ा था। प्रशासन का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एक सिविल अपील के आदेशानुसार, जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक कोई भी नया पट्टाभिषेक नहीं हो सकता। इसके बावजूद, माघ मेले में उनके कैंप के बाहर उन्हें ‘शंकराचार्य’ के रूप में प्रदर्शित किया गया है, जिसे प्रशासन ने अदालत के आदेश की अवहेलना माना है।
बदले की भावना से हो रही कार्रवाई | Magh Mela prayagraj
इन नोटिसों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि प्रशासन बदले की भावना से काम कर रहा है। उनके अनुसार, प्रशासन ने नोटिस को मुख्य द्वार के बजाय कैंप के पिछले हिस्से में चस्पा किया, जो उनकी मंशा पर सवाल उठाता है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के इस सख्त कदम ने संतों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है। यदि स्वामी जी का पक्ष संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो आगामी कुंभ और माघ मेलों में उनकी उपस्थिति पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। फिलहाल, सभी की नजरें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आधिकारिक जवाब और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
