Swami Avimukteshwaranand Controversy : प्रयागराज महाकुंभ के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की सेहत को लेकर चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। कड़ाके की ठंड के बीच खुले आसमान के नीचे लगातार धरने पर बैठने के कारण उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। इस बीच, मेला प्रशासन के साथ बढ़ते टकराव और मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान पर उनके अनुयायियों में रोष।
पिछले कुछ दिनों से खुले स्थान पर बैठने के कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अत्यधिक ठंड लग गई है, जिससे वे अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं। चिंता का विषय यह है कि अब तक किसी भी सरकारी या निजी चिकित्सक द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया गया है। उनके समर्थकों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर उपेक्षा कर रहा है। अभी तक उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर कोई आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है, जिसके कारण अनुयायियों में भारी नाराजगी और असंतोष देखा जा रहा है।
मेला अथॉरिटी का नोटिस से नाराज हैं शंकराचार्य।
शंकराचार्य की नाराजगी का मुख्य कारण महाकुंभ मेले में स्नान से रोका जाना और मेला अथॉरिटी द्वारा उन्हें जारी किया गया एक नोटिस है। इस नोटिस में कथित तौर पर उनकी योग्यता की डिग्री मांगी गई है। इस कदम को संतों और उनके अनुयायियों ने “धर्मगुरु का अपमान” करार दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि किसी भी अथॉरिटी को धर्मगुरु से उनकी डिग्री मांगने का अधिकार नहीं है और प्रशासन को यह अपमानजनक नोटिस तुरंत वापस लेना चाहिए।
मौलाना रजवी ने प्रशासन को क्षमा करने की दी सलाह।
विवाद के बीच मौलाना रजवी ने शंकराचार्य को एक बड़े धर्मगुरु के नाते सलाह दी है कि उन्हें प्रशासन को माफ कर देना चाहिए, क्योंकि क्षमा करने वाला व्यक्ति महान होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सब बराबर हैं और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने शंकराचार्य से अपील की है कि वे अपनी नाराजगी छोड़कर धरना समाप्त करें और अपने अनुयायियों को शांति का संदेश दें, ताकि महाकुंभ की मर्यादा और व्यवस्था बनी रहे।
