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SC ने CBSE की 3-भाषा नीति पर रोक लगाने से किया इनकार, कहा- “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता

Supreme Court Three Language Policy Case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई 3-भाषा नीति (Three Language Policy) पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। कोर्ट ने इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई अगले सप्ताह तक स्थगित कर दी।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant), जस्टिस जॉयमाल्य बागची (Justice Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी. मोहन (Justice V. Mohan) की पीठ ने की।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि नई नीति के तहत कक्षा 9 से छात्रों को दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इससे उन विद्यार्थियों को परेशानी होगी जो कक्षा 5 से फ्रेंच, जर्मन या अन्य विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने पर उन्हें अपनी पुरानी भाषा छोड़कर नई भारतीय भाषा पढ़नी पड़ सकती है।

याचिका में यह भी कहा गया कि नीति में अंग्रेजी को ‘गैर-मूल’ (Non-Native) भाषा माना गया है और अधिकांश स्कूलों में कई भारतीय भाषाओं के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता’

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत से कहा कि स्कूलों के पास न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही आवश्यक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि भाषा विकल्प बदलने से कई शिक्षकों की नौकरी पर असर पड़ सकता है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा,

“कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।”

जब यह कहा गया कि नई नीति के कारण कुछ शिक्षकों की नौकरी जा सकती है, तो CJI ने कहा,

“अगर उन्हें निकाला जाता है, तो हम उन्हें वापस नौकरी पर रखवा सकते हैं।”

मुकुल रोहतगी ने उठाए व्यावहारिक सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत के सामने व्यावहारिक समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जो छात्र अब तक फ्रेंच जैसी विदेशी भाषा पढ़ते रहे हैं, उनसे अचानक नई भारतीय भाषा सीखकर परीक्षा देने की अपेक्षा करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दिल्ली जैसे शहरों के सभी स्कूलों में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ या अन्य भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षक उपलब्ध हैं।

किताबें और शिक्षक नहीं होने का दावा

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि कई स्कूलों में नई भाषा पढ़ाने के लिए न तो प्रशिक्षित शिक्षक हैं और न ही पर्याप्त अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। उनका दावा था कि NCERT की वेबसाइट पर भी कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं।

केंद्र सरकार से 10 दिन में जवाब मांगा

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र, CBSE और NCERT अपना जवाब 10 दिनों के भीतर दाखिल करें।

अदालत ने महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री फौजिया खान की ओर से दायर हस्तक्षेप आवेदन पर भी पक्षकारों की दलीलें सुनीं। इसमें दावा किया गया कि नई भाषा नीति का विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अगले सप्ताह होगी विस्तृत सुनवाई

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की 3-भाषा नीति पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है, इसलिए यह नीति फिलहाल लागू रहेगी। मामले की अगली विस्तृत सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है, जहां अदालत सभी पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करेगी।

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