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मध्यप्रदेश में बढ़ रही आत्महत्याएं, ताजा रिर्पाेट ने बढ़ाई चिंता, देश के तीसरे पायदान पर राज्य

एनसीआरबी रिपोर्ट। मध्य प्रदेश में आत्महत्या के बढ़ते मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में हर दिन औसतन 42-44 लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जो देश में सबसे ज्यादा दरों में से एक है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीन रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में एक साल के दौरान 15 हजार 491 लोगों ने आत्महत्या की। यह संख्या देश में दर्ज कुल आत्महत्याओं का करीब 9.1 प्रतिशत है। इस आंकड़े के साथ मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

सुसाइड की ऐसी वजह

बढ़ती सुसाइड की घटनाओं का जो कारण सामने आ रहा है। उसकी वजह आर्थिक तंगी, नशा, और पारिवारिक विवाद, बीमारी, आर्थिक दबाव, मानसिक अवसाद और भविष्य को लेकर असुरक्षा जैसी वजहें प्रमुख रूप से सामने आई हैं। इसमें 3 हजार से अधिक लोगों ने गंभीर बीमारियों से परेशान होकर आत्महत्या की। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और समय पर काउंसलिंग नहीं मिलना भी बड़ी वजह बन रहा है।

हेल्पलाइन की ले मदद

यह समस्या मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहयोग की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक दबाव में है, तो कृपया किसी मनोचिकित्सक या हेल्पलाइन से सहायता लें।

मुख्य बिंदु

आंकड़े- राज्य में 15,000 से अधिक लोगों ने और दो साल में 32,000 से अधिक लोगों ने जान गंवाई है।
युवा और किसान- आत्महत्या करने वालों में बड़ी संख्या में छात्र (987) और किसान, मजदूर शामिल हैं।
मुख्य कारण- मानसिक तनाव, बेरोजगारी, कर्ज़, पारिवारिक समस्याएँ और नशा आत्महत्या के बड़े कारण हैं।
कार्यवाही- सरकार ने आत्महत्या रोकथाम के लिए कार्य बल का गठन किया है, लेकिन स्थिति अभी भी भयावह है।

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