भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को हाहाकार मच गया, जहां बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी हो गए। Stock Market Crash Today की मुख्य वजह अमेरिका की नई व्यापार नीतियां और दिग्गज IT कंपनियों के कमजोर वित्तीय नतीजे रहे। दिन के अंत तक निवेशकों की पूंजी में करीब 9 लाख करोड़ रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में डर का माहौल है।
Stock Market Crash Today: बाजार गिरने के बड़े कारण
भारतीय इक्विटी बेंचमार्क निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स में सत्र के दूसरे भाग में तेज गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,066 अंक यानी 1.28% गिरकर 82,180.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 353 अंक फिसलकर 25,232.50 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट ने निवेशकों के मन में भविष्य की आर्थिक स्थिरता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

IT सेक्टर और अर्निंग्स का दबाव
बाजार की इस गिरावट में टेक्नोलॉजी शेयरों का सबसे बड़ा हाथ रहा। निफ्टी IT इंडेक्स में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दरअसल, तीसरी तिमाही (Q3) के शुरुआती नतीजे उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। निवेशकों को डर है कि एक्सपोर्ट पर निर्भर IT कंपनियों की प्रॉफिट रिकवरी में देरी हो सकती है। जब तक ऑटो जैसे अन्य सेक्टर के नतीजे नहीं आते, यह अनिश्चितता बनी रह सकती है।
ट्रंप की टैरिफ नीति और वैश्विक उथल-पुथल
ग्लोबल मार्केट से मिल रहे खराब संकेतों ने घरेलू बाजार पर गहरा असर डाला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ के आठ देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी ने व्यापारिक तनाव बढ़ा दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण एशिया-पैसिफिक बाजारों में भी गिरावट देखी गई। ट्रंप प्रशासन का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की कोशिशों से जुड़ा रुख वैश्विक व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर रहा है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार निकासी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दस सत्रों से विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं। सोमवार को ही FIIs ने करीब 3,263 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 4,234 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक दबाव के आगे यह नाकाफी साबित हुआ।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोना और चांदी
बाजार में जोखिम बढ़ने के कारण निवेशक अब सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,700 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गईं। चांदी ने भी रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ और घरेलू बाजार में 3.20 लाख रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई। जब भी शेयर बाजार में अस्थिरता आती है, कीमती धातुओं में निवेश बढ़ जाता है।

आगे की राह और निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और यूरोप के बीच टैरिफ विवाद पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप-युग के टैरिफ पर आने वाले संभावित फैसलों पर भी बाजार की नजर है। यदि कानूनी रुख बदलता है, तो बाजार की दिशा में रातों-रात बदलाव आ सकता है। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और ‘Wait and Watch’ की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
निष्कर्ष: आज की गिरावट ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय बाजार फिलहाल वैश्विक नीतिगत बदलावों और विदेशी फंडों की निकासी के प्रति काफी संवेदनशील है। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और अमेरिकी व्यापारिक फैसले बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
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