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Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट से निवेशक को करोड़ों का घाटा

Stock Market Crash: Investors' wealth eroded by ₹3 lakh crore due to a drop in Sensex and Nifty.Stock Market Crash: Investors' wealth eroded by ₹3 lakh crore due to a drop in Sensex and Nifty.

Stock Market Crash: Investors' wealth eroded by ₹3 lakh crore due to a drop in Sensex and Nifty.

Stock Market Crash: भारतीय स्टॉक मार्केट में 14 जुलाई से ही कमजोरी देखने को मिली बीएसई सेंसेक्स 561.08 मार्क्स यानी 0.72% से गिरकर 77054.94 पर बंद हो गया। जबकि निफ्टी 50 में 159.15 मार्क्स यानी 0.66% की गिरावट पर देखा गया और यह 24052.05 पर बंद हुआ। वैश्विक भू राजनीतिक तनाव कच्चे तेल के बढ़ते कीमत और विदेश की निवेश करने वाले लोगों की बिकवाली इस गिरावट की प्रमुख वजह देखने को मिल रहा है।

Stock Market में गिरावट का पूरा विवरण क्या है

स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार बिजनेस के सत्र के दौरान सेंसेक्स में 77468 पॉइंट 81 का इंट्राडे हाय और 76896.67 लो बनाया था। वहीं निफ्टी 50 भी पूरे दिन दबाव में दिख रहा था बाजार बंद होने तक bse में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 3 लाख करोड रुपए तक घट गया था। जिससे निवेश करने वाले लोगों की कुल संपत्ति में कमी देखने को मिल रही है।

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क्या है गिरावट के प्रमुख कारण

बाजार विश्लेषकों के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक निवेश करने वाले लोगों ने रिस्क वाले एसेट्स से दूरी बना लिए हैं। इसके साथ ही ब्रेड क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी होने से महंगाई और भारत के आयात बिल को लेकर चिंता का माहौल देखने को मिल रहा है। केवल इतना ही नहीं विदेशी संस्थागत निवेश करने वाले लोगों की बिकवाली होने से बाजार पर ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है इसके अलावा हाल ही के सप्ताह में आए तेजी के बाद कहीं निवेश करने वाले लोगों ने प्रॉफिट बुकिंग भी हासिलकी है।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है

Stock Market Crash होने से सबसे ज्यादा असर बैंकिंग फाइनेंशियल सेवाएं ऑटो और आईटी सेक्टर के शेरों में देखने को मिल रहा है। Hcl टेक्निकल, बजाज फिनसर्व, एसबीआई लार्सन ऐंड टुब्रो और महिंद्रा जैसे बड़े शेयर इसमें लाल निशान में बंद हुए हैं। दूसरी तरफ कुछ डिफरेंस सेक्टर में भी अपेक्षा अनुसार सीमित गिरावट देखने को मिली है। जिससे बाजार में सेक्टर आधारित डिफरेंस साफ दिखाई देने लगा है।

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क्या है विशेषज्ञों की राय और आगे का आउटलुक

बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित है और इसे फिलहाल लंबी अवधि की मंदी का संकेत नहीं मान सकते हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत हो विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और फिर इंटरनेशनल घटनाओं पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर होने वालीहै। अगर वैश्विक महल स्थित रहता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव की बीच ही स्थिरता का माहौल आ सकता है। हालांकि विशेषज्ञ निवेश करने वाले लोगों को कुछ समय के उतार-चढ़ाव के आधार पर फैसला लेने से बचने और कंपनी के बुनियादी प्रदर्शन पर नजर रखने की सलाह जरूर दे रहे हैं यह आर्टिकल केवल समाचार के उद्देश्य से ऐसे निवेश की सलाह के रूप में नहीं समझे।

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