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Sonam Wangchuk News: ‘Will Stay Alive Till July 20,’ Activist Enters Day 20 of Fast Amid Critical Health Warnings

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Sonam Wangchuk News: लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन अनशन अब एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच चुका है। 28 जून 2026 से शुरू हुआ यह संघर्ष आज अपने 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है। डॉक्टरों की गंभीर चेतावनियों और तेजी से गिरते स्वास्थ्य के बीच, सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए बेहद दृढ़ संकल्प के साथ कहा है, “मैं किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जीवित रहूंगा।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर पर पुलिस की ‘लगातार और दखलंदाजी वाली निगरानी’ के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) पर 20 जुलाई को ही सुनवाई होनी है। इस बार इस sonam wangchuk news ने न केवल लद्दाख, बल्कि पूरे देश के छात्रों और युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि इस अनशन का दायरा लद्दाख के पर्यावरण से बढ़कर देश की शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों तक फैल चुका है।

दो मोर्चों पर लड़ाई: शिक्षा सुधार (जून 2026) और लद्दाख का अस्तित्व

इस बार सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल एक क्षेत्रीय मांग नहीं है। जून 2026 में शुरू हुए इस अनशन के जरिए उन्होंने देश के युवाओं के भविष्य और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठाया है। वे राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाओं में आ रही कमियों के खिलाफ खड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर लद्दाख के जल-जंगल-जमीन की पुरानी लड़ाई भी उतनी ही मजबूती से जारी है।

इस दोहरे आंदोलन और उनकी सभी प्रमुख मांगों को नीचे दी गई तालिका में विस्तार से समझा जा सकता है:

सोनम वांगचुक के अनशन की मुख्य मांगें (2026)

आंदोलन का क्षेत्रमुख्य मांगें और कारणलक्ष्य और प्रभाव
1. शिक्षा और परीक्षा प्रणाली (जून 2026)• परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक: NEET-UG 2026 और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुए कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ युवाओं के आंदोलन का समर्थन।
• केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग: पूरी प्रशासनिक विफलता के लिए जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
• छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा: लचर व्यवस्था और अवसाद के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के भविष्य और देश के एजुकेशनल स्ट्रक्चर को बचाना।
देश की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणालियों में पारदर्शिता लाना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना।
2. लद्दाख की स्वायत्तता और अधिकार• संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule): लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करना ताकि स्थानीय जनजातीय समाज को जमीन, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा के लिए स्वायत्त अधिकार मिल सकें।
• पूर्ण राज्य का दर्जा: बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश (UT) के बजाय लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना ताकि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व बहाल हो सके।
लद्दाख के स्थानीय लोगों को निर्णय लेने का अधिकार देना और उनके राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करना।
3. पर्यावरण और पारिस्थितिकी संरक्षण• ग्लेशियरों का संरक्षण: लद्दाख के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बड़े औद्योगिक घरानों के अनियंत्रित खनन और व्यावसायिक दोहन से पूरी तरह बचाना।जलवायु परिवर्तन के दौर में भारत के सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोतों (ग्लेशियरों) की रक्षा करना।

स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति: डॉक्टरों की कड़ी चेतावनी

20 दिनों के लगातार उपवास ने 59 वर्षीय एक्टिविस्ट के शरीर पर गहरा और चिंताजनक असर डाला है। डॉक्टरों की मेडिकल टीम ने आधिकारिक रूप से चेतावनी दी है कि उनका प्रोलॉन्ग्ड फास्ट (लंबे समय से जारी अनशन) अब एक बेहद नाजुक और खतरनाक (Critical Stage) स्थिति में पहुंच गया है। शरीर के कई महत्वपूर्ण पैरामीटर्स में गिरावट आई है और अंगों पर दबाव बढ़ रहा है।

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इसके बावजूद, वांगचुक का इरादा बिल्कुल नहीं डिगा। उन्होंने माना कि उनका शरीर कमजोर हो रहा है, लेकिन उनका कहना है कि इस लचर व्यवस्था के कारण अवसाद में आ रहे छात्रों और देश के पर्यावरण को बचाने के लिए यह सर्वोच्च बलिदान देने का समय है।

जंतर-मंतर पर पुलिस सर्विलांस का विवाद: 20 जुलाई की कानूनी लड़ाई

इस आंदोलन में एक नया कानूनी मोड़ तब आया जब प्रदर्शन स्थल पर दिल्ली पुलिस की अत्यधिक निगरानी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से बैठे प्रदर्शनकारियों की चौबीसों घंटे वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है, जो मौलिक अधिकारों और निजता का उल्लंघन है।

सोनम वांगचुक ने विशेष रूप से 20 जुलाई की तारीख का जिक्र इसीलिए किया है क्योंकि इसी दिन दिल्ली हाई कोर्ट इस ‘इंट्रूसिव सर्विलांस’ पर सुनवाई करने वाला है। वांगचुक का यह बयान कानून व्यवस्था और प्रशासन पर एक नैतिक दबाव बनाता है, जो शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के आरोपों से घिरा है।

निष्कर्ष

सोनम वांगचुक का जून-जुलै 2026 का यह अनशन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुका है। यह अब केवल लद्दाख के पहाड़ों की रक्षा की लड़ाई नहीं रही, बल्कि यह देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य, NEET-UG जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं की शुचिता और नागरिक अधिकारों की रक्षा का एक साझा मंच बन गया है। गिरते स्वास्थ्य के बीच उनका यह कहना कि वे “20 जुलाई तक हर हाल में जीवित रहेंगे”, उनके भीतर की अटूट इच्छाशक्ति को दर्शाता है। अब पूरे देश की नजरें 20 जुलाई को होने वाली अदालती कार्रवाई पर टिकी हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. सोनम वांगचुक ने जून 2026 में नया अनशन क्यों शुरू किया?

सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया। इस बार उनके अनशन का मुख्य कारण NEET-UG 2026 और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुए कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का समर्थन करना और देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना है।

2. इस अनशन में शिक्षा मंत्री से जुड़ी क्या मांग है?

सोनम वांगचुक राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई प्रशासनिक विफलता और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

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3. क्या इस आंदोलन में लद्दाख के मुद्दे अभी भी शामिल हैं?

हाँ, शिक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने, उसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने और वहां के संवेदनशील ग्लेशियरों को औद्योगिक दोहन से बचाने की मांगें इस आंदोलन का मुख्य आधार बनी हुई हैं।

4. सोनम वांगचुक ने “20 जुलाई तक जीवित रहने” का बयान क्यों दिया?

20 जुलाई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की जा रही लगातार और दखलंदाजी वाली पुलिस निगरानी (Surveillance) पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करेगा। वांगचुक इस कानूनी फैसले तक आंदोलन को मजबूती से थामे रखना चाहते हैं।

5. डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर क्या चेतावनी दी है?

चूंकि उनके अनशन को 20 दिन पूरे हो चुके हैं, डॉक्टरों का कहना है कि उनका उपवास एक बेहद क्रिटिकल स्टेज (गंभीर स्थिति) में पहुंच चुका है, जिससे उनके शरीर के अंगों के सुचारू रूप से काम करने पर खतरा मंडरा रहा है।

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