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Sonam Wangchuk Hunger Strike: 16वें दिन 8.2 किलो घटा वजन, CJP आंदोलन के समर्थन में उतरी AAP; जानिए पूरा मामला

Sonam Wangchuk Hunger StrikeSonam Wangchuk Hunger Strike

Sonam Wangchuk Hunger Strike: देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े नागरिक और छात्र आंदोलन का गवाह बन रहा है। देश के जाने-माने शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले चल रहे इस विरोध प्रदर्शन का आज 24वां दिन है, जबकि खुद सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज 16वां दिन है।

इस आंदोलन की गूंज अब संसद से लेकर सड़क तक सुनाई दे रही है। परीक्षाओं में कथित धांधली, विशेष रूप से NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विरोध स्थल का दौरा कर प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की है।

जंतर-मंतर से ग्राउंड रिपोर्ट: सोनम वांगचुक की सेहत पर लेटेस्ट मेडिकल बुलेटिन

16 दिनों के निरंतर उपवास ने 59 वर्षीय सोनम वांगचुक के शरीर पर गहरा असर डाला है। जंतर-मंतर पर तैनात डॉक्टरों और CJP द्वारा जारी हेल्थ अपडेट के अनुसार, वांगचुक की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है।

ब्लड ग्लूकोज और बीपी में भारी गिरावट

मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, अनशन की शुरुआत से लेकर अब तक सोनम वांगचुक का 8.2 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। सबसे ज्यादा चिंता उनके गिरते ब्लड ग्लूकोज लेवल को लेकर है, जो घटकर 67 mg/dL पर आ गया है। इसके अलावा उनका ब्लड प्रेशर (BP) 107/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया है। इतनी गंभीर शारीरिक गिरावट के बावजूद वांगचुक ने अनशन तोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, वह पीछे नहीं हटेंगे।

अभिजीत दिपके की केंद्र से अपील: “यह अहंकार की लड़ाई नहीं, जिंदगियों का सवाल है”

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार से भावुक और तार्किक अपील की है। उन्होंने लिखा:

“यह सोनम वांगचुक के अनशन का 16वां दिन है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इसे अहंकार की लड़ाई न बनाएं, क्योंकि यहाँ इंसानी जिंदगियां दांव पर लगी हैं। अपनी गलती स्वीकार करना कमजोरी की निशानी नहीं होती, बल्कि यह परिपक्वता, जवाबदेही और सुधार करने की इच्छा को दर्शाता है। हम सिर्फ जवाबदेही मांग रहे हैं।”

क्या है Cockroach Janta Party (CJP) का यह आंदोलन?

बहुत से लोग इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर CJP क्या है और यह आंदोलन अचानक इतना बड़ा कैसे हो गया। दरअसल, इस आंदोलन की शुरुआत मई 2026 में एक प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी, जब बेरोजगारी और छात्रों के मुद्दों पर चर्चा के दौरान कुछ टिप्पणीकारों द्वारा युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से करने की बात सामने आई थी। सोशल मीडिया पर देखते ही देखते इसके 22 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हो गए और यह युवाओं की आवाज बन गया।

NEET-UG पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितता का विरोध

CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर अपना पक्का मोर्चा लगा रखा है। इस आंदोलन की मुख्य धुरी देश की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं—विशेषकर NEET-UG और UGC-NET—में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताएं और पेपर लीक के आरोप हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

इस पूरे आंदोलन की सबसे प्रमुख और गैर-बातचीत वाली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। CJP और प्रदर्शनकारी छात्रों का स्पष्ट मानना है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार होने वाली चूक नैतिक और प्रशासनिक विफलता है, जिसकी जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व को लेनी चाहिए। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और एक पूरी तरह से पारदर्शी, फुल-प्रूफ परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग भी की जा रही है।

आतिशी और AAP प्रतिनिधिमंडल का दौरा: राजनीतिक हलचल तेज

जैसे-जैसे सोनम वांगचुक का अनशन लंबा खींच रहा है, वैसे-वैसे देश के विपक्षी दलों का समर्थन भी जंतर-मंतर की ओर मुड़ रहा है। आंदोलन के 24वें दिन आम आदमी पार्टी (AAP) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जंतर-मंतर पहुंचा।

‘युवाओं के हक की लड़ाई’ में विपक्ष एकजुट

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही आतिशी के साथ विधायक कुलदीप कुमार और पूर्व मेयर शैली ओबेरॉय भी शामिल थीं। वांगचुक से मुलाकात के बाद आतिशी ने सोशल मीडिया पर लिखा:

“जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक जी से मुलाकात की, जिनका अनशन 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है। भले ही उनका स्वास्थ्य गिर रहा है, लेकिन उनका हौसला बेहद मजबूत है। वह इस देश के युवाओं के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सोनम और युवा प्रदर्शनकारियों को और ताकत मिले।”

AAP के अलावा, CPI(M) के सांसद अमरा राम और आंध्र प्रदेश व राजस्थान के कई वरिष्ठ वामपंथी नेताओं ने भी मंच पर आकर इन मांगों का पुरजोर समर्थन किया। इसके अलावा पूर्व में समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज और केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा ने भी यहां आकर सरकार की ‘उदासीनता’ पर कड़े सवाल उठाए थे।

20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च का रोडमैप

राजनीतिक और सामाजिक दलों से मिल रहे इस भारी समर्थन के बीच CJP ने अपने आंदोलन को अगले स्तर पर ले जाने की घोषणा की है। आंदोलनकारियों ने 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है। इस मार्च में देश भर से छात्र संगठनों, किसान नेताओं और खाप प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में दिल्ली में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक तापमान दोनों बढ़ने की संभावना है।

इस आंदोलन का देश की शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर होगा?

sonam wangchuk hunger strike सिर्फ एक व्यक्ति का उपवास नहीं है, बल्कि यह भारत की सड़ चुकी परीक्षा और प्रशासनिक प्रणाली के खिलाफ एक सामूहिक चेतना का उभार है।

  1. सिस्टम में जवाबदेही की मांग: सालों से छात्र चुपचाप पेपर लीक और भ्रष्टाचार को अपनी नियति मानकर स्वीकार कर रहे थे। लेकिन इस आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि अब देश का युवा चुप बैठने वाला नहीं है।
  2. पारदर्शिता की आवश्यकता: NTA जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता अब पूरी तरह दांव पर है। सरकार चाहे इस आंदोलन को दबाने की कितनी भी कोशिश करे, लेकिन उसे अंततः परीक्षा प्रणाली में बड़े तकनीकी और प्रशासनिक सुधार करने ही होंगे।
  3. नागरिक समाज और छात्रों का गठबंधन: पर्यावरण की लड़ाई लड़ने वाले सोनम वांगचुक का छात्रों के हक के लिए बैठना यह दिखाता है कि देश के गंभीर विचारक अब युवाओं के मुद्दों को सबसे ऊपर रख रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन अब महज़ एक धरना नहीं रह गया है, यह भारतीय लोकतंत्र में नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। एक तरफ जहां 16 दिनों से भूखे सोनम वांगचुक का जीवन दांव पर लगा है, वहीं दूसरी तरफ देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की यह बात बिल्कुल सही बैठती है कि सरकार को इसे अपने ‘अहंकार की लड़ाई’ न बनाकर तुरंत टेबल पर आना चाहिए और बातचीत के जरिए इसका समाधान निकालना चाहिए। यदि समय रहते केंद्र सरकार ने इस पर कोई संवेदनशील कदम नहीं उठाया, तो 20 जुलाई का संसद मार्च सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन सकता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल (Hunger Strike) क्यों कर रहे हैं?

Ans: सोनम वांगचुक Cockroach Janta Party (CJP) के आंदोलन के समर्थन में अनशन पर हैं। यह आंदोलन NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के खिलाफ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।

Q2: सोनम वांगचुक के अनशन को कितने दिन हो चुके हैं और उनकी सेहत कैसी है?

Ans: 13 जुलाई 2026 तक सोनम वांगचुक के अनशन का 16वां दिन है (जबकि CJP के कुल विरोध प्रदर्शन का 24वां दिन है)। उनका वजन 8.2 किलोग्राम घट चुका है और ब्लड ग्लूकोज लेवल खतरनाक रूप से 67 mg/dL तक गिर गया है।

Q3: Cockroach Janta Party (CJP) क्या है और यह विरोध कब शुरू हुआ?

Ans: CJP की शुरुआत मई 2026 में एक प्रतीकात्मक छात्र आंदोलन के रूप में हुई थी। उन्होंने 20 जून 2026 से जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।

Q4: इस आंदोलन को किन राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है?

Ans: इस आंदोलन को आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता आतिशी, समाजवादी पार्टी (SP), CPI(M) और कई किसान व खाप संगठनों का खुला समर्थन मिला है।

Q5: CJP और प्रदर्शनकारियों का अगला कदम क्या है?

Ans: अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने और सरकार को जगाने के लिए प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक बड़े और शांतिपूर्ण ‘संसद मार्च’ का आह्वान किया है।

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