Smoke from Mouth”: आपने अक्सर यह महसूस किया होगा कि सर्दियों के मौसम में जब हम सुबह-सुबह लंबी सांस छोड़ते हैं या फिर बात करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे मुंह से धुआं निकल रहा हो। क्या दृश्य न केवल देखने में मजेदार लगता है बल्कि बहुत लोगों ने बचपन में से खेल की तरह भी देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही मुंह से निकलने वाला धुआं गर्मियों के मौसम में गायब क्यों हो जाता है? विज्ञान इस रहस्य को समझता है और बताता है कि इसके पीछे फेफड़े और बाहरी तापमान का कारण होता है।
मुंह से धुआं क्यों दिखाई देता है?
डॉ राहुल शर्मा फोर्टिस के पल्मनोलॉजिस्ट बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में ये प्रक्रिया संघनन कहलाती है। हमारी सास में मौजूद गम और नम हवा जब ठंडी बाहरी हवा से टकराती है तो हवा में मौजूद जलवाष्प छोटे-छोटे बूंद में बदल जाते हैं। उसके बाद यही बंदे मुंह से निकलने वाले धुएं की तरह नजर आती है इस द दुआ समझाना गलत होता है क्योंकि इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं होता है यह एक पूरी तरह से सुरक्षित प्राकृतिक प्रक्रिया होती है।
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गर्मियों में यह क्यों नहीं दिखता?
गर्मी के मौसम में बाहर का तापमान आमतौर पर हमारे शरीर के गर्म सांस के करीब होता है इसलिए इसका परिणाम है कि हमारे मुंह से धुएं जैसी कोई भी घटना नहीं होती है अगर इससे भी आसान शब्दों में बोला जाए तो ठंडी हवा की कमी के कारण हमारी सांस की नमी सीधे हवा में मिल जाती है और भाप का रूप ले लेती है।
फेफड़ों की क्षमता का संकेत
“Smoke from Mouth” या फिर मुंह से निकलने वाला धुआं का दृश्य केवल मजा ही नहीं देता बल्कि आपके फेफड़ों की क्षमता का भी संकेत होता है जब हमारी सांस बाहर निकलते समय संगीन होकर भाप बनती है। तो इससे हमें पता चलता है कि हमारे फेफड़ों हवा को गर्म और नम रखने की पूरी क्षमता रखते हैं। यदि यह भाप बहुत कम दिखाई दे या बिल्कुल ना दिखे तो कभी-कभी यह फेफड़ों की क्षमता में कमी का संकेत भी हो जाता है।
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वैज्ञानिक तथ्य और सामान्य सावधानियां
हालांकि यह प्रक्रिया 100% प्राकृतिक और सुरक्षित होती है बच्चों और बुजुर्गों में से देखने में ज्यादा मजा आता है। क्योंकि सर्दियों की ठंडी हवा और गर्म सांस का अंतर सबसे अधिक होता है डॉक्टरों की सलाह है कि इस प्राकृतिक भाग का आनंद लिया जा सकता है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। सर्दियों में “Smoke from Mouth” का ये रहस्य सब हमें सिर्फ विज्ञान की ही नहीं बल्कि अपने बचपन की यादें भी याद दिलाता है। अगली बार जब आप भी अपने मुंह से ठंडी हवा में सांस छोड़ें तो समझे कि यह धुआं नहीं बल्कि अपने की फेफड़ों की क्षमता और प्राकृतिक रूप से संघनन का खेल है।

