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सिंगरौली का कोयला और बिजली उत्पादन ने बनाया इसे ऊर्जांचल, दिल्ली भी होती है रोशन, मना रहा अपना गौरव दिवस

सिंगरौली। जब भी भारत के औद्योगिक विकास, बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा की बात होती है, तो मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में सामने आता है। यह जिला केवल कोयला, बिजली या भारी उद्योगों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि अपनी मिट्टी, धरती, नदियाँ, जंगल और सामाजिक विविधता के कारण भी एक अलग पहचान रखता है।

50वां जिला बना है

सिंगरौली मध्य प्रदेश राज्य का 50 वाँ जिला है, जिसे 24 मई 2008 को सीधी जिले से विभाजित कर के बनाया गया, जिसमें मध्य प्रदेश के सीधी जिले के पूर्वी भाग और उत्तर प्रदेश के सोनीभद्र जिले के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। ऐतिहासिक रूप से सिंगरौली रीवा की एक रियासत थी, जो बघेलखंड क्षेत्र का हिस्सा था। यह प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से संपन्न एक क्षेत्र है, प्राचीन काल में यह क्षेत्र घने जंगलों और दुर्गम इलाकों से ढंका हुआ था। खनिज संसाधनों और तापीय विद्युत संयंत्रों के प्रचुरता के कारण इसे उर्जांचल नाम दिया गया है।

ऐसे बना ऊर्जांचल

सिंगरौली को प्रचुर मात्रा में कोयला भंडार, भारत का सबसे बड़ा तापीय विद्युत उत्पादन केंद्र होने और दर्जनों बिजली संयंत्रों के संचालन के कारण मध्य प्रदेश की ऊर्जा राजधानी तथा ऊर्जांचल कहा जाता है। यह क्षेत्र देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। सिंगरौली में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानें हैं, जो देश और दुनिया की कोयले की मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में उत्पादन करती हैं। यहाँ 10 से अधिक बड़ी बिजली कंपनियां संचालित हैं।

भारत का सबसे बड़ा तापीय विद्युत स्टेशन

सिंगरौली के वैढ़न में स्थित है, एनटीपीसी का एक प्रमुख प्लांट है। यह क्षेत्र न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली की आपूर्ति में अपना योगदान देता है। सिंगरौली जिले में उच्च गुणवत्ता वाला कोयला प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसे काला हीरा के नाम से भी जाना जाता है। जो ताप विद्युत संयंत्रों के लिए मुख्य ईंधन का काम करता है। इसी कोयले की उपलब्धता ने सिंगरौली को ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बना दिया।

दिल्ली को रोशन करती है सिंगरौली की बिजली

सिंगरौली जिले में एनटीपीसी विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन एशिया के सबसे बड़े ताप विद्युत संयंत्रों में से एक है। इसके अलावा सासन, महान, रिहंद, अनपरा और शक्तिनगर जैसे पावर प्रोजेक्ट्स भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं। इन सभी परियोजनाओं से प्रतिदिन हजारों मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। जिससे बिजली आपूर्ति केवल स्थानीय या राज्य स्तर तक ही नहीं है बल्कि सिंगरौली जिले में उत्पादित बिजली राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली सहित कई राज्यों तक पहुँचाई जाती है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।

मौजूद है रॉक कट गुफाएं

जिला मुख्यालय बैढन से 32 किलोमीटर की दूरी पर माडा में, 7 से 8 वीं शताब्दी की अवधि में कलात्मक रूप से नक्काशीदार रॉक कट गुफाएं देखी जा सकती हैं। प्रसिद्ध गुफाओं में गणेश माडा , विवाह माडा, शंकर माडा, जलजलिया और रावण माडा शामिल हैं। ये गुफाएँ रॉक कट वास्तुकला के सुंदर उदाहरण हैं।

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