भारतीय कमोडिटी बाजार में सोमवार को एक अभूतपूर्व हलचल देखी गई, जब चांदी की कीमतों ने पहली बार ₹3 लाख प्रति किलोग्राम का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया। वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं के प्रति बढ़ते आकर्षण और घरेलू मांग में मजबूती के चलते Silver Price Surges की स्थिति बनी हुई है। निवेशकों के बीच बढ़ते उत्साह ने चांदी और सोने, दोनों को ही नए शिखर पर पहुंचा दिया है।
MCX पर चांदी ने तोड़े पुराने सभी रिकॉर्ड
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार को कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया। मार्च डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव ₹13,553 यानी लगभग 4.71 प्रतिशत बढ़कर ₹3,01,315 प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह के दौरान चांदी की कीमतों में करीब 14 प्रतिशत की तेजी आई है, जो निवेशकों के लिए बड़े मुनाफे का संकेत है।

सोने की कीमतों में भी भारी उछाल
चांदी के साथ-साथ सोने ने भी आज नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। MCX पर फरवरी अनुबंध वाला सोना ₹2,983 की बढ़त के साथ ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर जा पहुंचा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है, जिससे कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना $4,698 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है।
Silver Price Surges: आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, चांदी की कीमतों में इस असाधारण तेजी के पीछे कई वैश्विक और स्थानीय कारक जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की कमजोरी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) ने निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स से हटाकर कीमती धातुओं की ओर मोड़ा है। वहीं, Comex पर चांदी के भाव $94.35 प्रति औंस तक पहुंचना भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर साबित हुआ।

इंडस्ट्रियल डिमांड ने भी पकड़ी रफ्तार
सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में अधिक तेजी का एक मुख्य कारण इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर पैनल और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं और भविष्य की मांग को देखते हुए बड़े संस्थानों ने चांदी का स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजार के जानकारों का मानना है कि वर्तमान में चांदी की कीमतों में आई तेजी ‘सप्लाई की कमी’ और ‘पैनिक बाइंग’ का मिला-जुला परिणाम है। हालांकि, इतनी बड़ी रैली के बाद बाजार में थोड़ी गिरावट या ‘प्रॉफिट बुकिंग’ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में नए निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए ही कोई कदम उठाना चाहिए।
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