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सरकार ने Silver Import पर लगाई पाबंदी, उद्योगपति बोले आदेश ‘सर आंखों पर’

Silver Import: Centre bans silver imports, emphasis on saving foreign exchangeSilver Import: Centre bans silver imports, emphasis on saving foreign exchange

Silver Import: Centre bans silver imports, emphasis on saving foreign exchange

केंद्र सरकार ने सिल्वर एक्सपोर्ट को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए कई श्रेणी की चांदी के आयात को रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में डाल दिया है। दरअसल सरकार का यह कदम बढ़ाते इंपोर्ट बिल और विदेशी मुद्रा भंडार के दबाव को कम करने के लिए लिया गया है हाल ही के महीना में Silver Import मैं तेज बढ़ोतरी देखी गई थी जिससे ऊर्जा और उर्वरक जैसे जरूरी आयात पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गईथी।

Silver Import में तेज उछाल, चिंता का कारण

वाणिज्य मंत्रालय की सूचना के अनुसार 99.9% शुद्धता वाले सिल्वर बार सहित कई सिल्वर प्रोडक्ट के आयात के लिए अब सरकार की अनुमति जरूरी होगी। इससे पहले यह सभी प्रोडक्ट फ्री इंपोर्ट में आते थे। स्टॉक एक्सचेंज डाटा और बिजनेस रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान भारत का Silver Import कब बल बढ़ता हुआ दिखता है भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में भी शामिल है और अपनी जरूरत का सबसे बड़ा हिस्सा आयात के जरिए ही पूरा करता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेश की मांग बढ़ने से चांदी की खरीद में तेजी देखी गईहै।

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सरकार विदेशी मुद्रा बचाने की प्लानिंग के फोकस में

सरकारी जानकारी के अनुसार कच्चे तेल गैस और उर्वरकों के आयात पर बढ़ते खर्च के बीच गैर जरूरी आयात को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है। वैश्विक लेवल पर ऊर्जा की कीमतों में उतर-चढ़ा और डॉलर की मजबूती होने के कारण भारत की विदेशी मुद्रा भंडार पर ज्यादा दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषकों के मुताबिक Silver Import पर नियंत्रण होने से सरकार डॉलर की बचत करना चाहती है ताकि आवश्यक वस्तुओं के आयात में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। इससे चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

ज्वेलरी और निवेश बाजार पर हो सकता है असर

सरकार की इस फैसले का असर घरेलू सिल्वर मार्केट पर देखने को मिलेगा उद्योग विशेषज्ञ की जानकारी के अनुसार आयत का प्रक्रिया जटिल होने से सप्लाई की प्रक्रिया प्रभावित होने वाली है जिससे घरेलू बाजार में चांदी की कीमत बढ़ेगी। छोटे-छोटे ज्वेलर्स और सिल्वर ट्रेडर्स के लिए नई लाइसेंस व्यवस्था अब चुनौती बनने वाली है। वही सिल्वर और फिजिकल निवेश में इंटरेस्ट रखने वाले निवेशकों को भी अब ऊंचे प्रीमियम का सामना करने को मिलेगा।

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इसपर बाजार विशेषज्ञों की क्या है राय

कमोडिटी बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह कदम कुछ समय में घरेलू कीमतों को सपोर्ट दे सकता है। हालांकि लंबे समय में सरकार का उद्देश्य आयात की निर्भरता को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा को मजबूत करना है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक सिल्वर की कीमतों में तेजी देखी जाती है तो घरेलू बाजार में कीमतों का अंतर और ज्यादा बढ़ेगा।

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