भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ‘मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता यानि की श्रम शक्ति संहिता 2026 को मंजूरी दे दिए है। जिस प्रदेश में संचालित होने वाले दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अब बंद होने की समस्या लगभग सामाप्त हो गई है और संचालक सातों दिन 24 घंटे अपना कारोबार कर सकेंगे। इस कानून में यह भी व्यवस्था की गई है कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों से संचालक 24 घंटे काम नही करवाऐगे, बल्कि उनके लिए जो श्रम कानून के तहत समय तय है उसी के तहत काम करवा सकेगे, यानि की कर्मचारियों की ड्यूटी शिफ्ट में लगानी होगी और तय समय के बाद शिफ्ट बदलनी होगी।
अब रात में भी कर सकेगे खरीदारी
सरकार के श्रम शक्ति संहिता 2026 की मंजूरी के बाद अब लोगो को रात में भी जरूरत के सामान मिल सकेगे, यानि की रात में खाना-पानी समेत घर गृहस्थी के भी सामानों की खरीदी करने के लिए लोगो को अब समय की दिक्कत नही होगी, खात तौर से ऐसे लोगो के लिए यह निणर्य काफी सुविधा पहुचाऐगा, जो काम काजी है। वे दिन में अपनी डूयुटी करने के बाद रात में बाजार का काम यानि की खरीदारी भी कर सकेगे।
सुरक्षा पर फोकस
इस नए कानून में सुरक्षा पर भी विशेष फोकस किया गया है। प्रतिष्ठान संचालक को काम की जगह पर साफ-सफाई, सुरक्षा उपकरण, आग से बचाव और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था करनी होगी। किसी हादसे या खतरे की स्थिति में अधिकारी जांच कर कार्रवाई कर सकेंगे। महिला कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित माहौल और काम से जुड़े सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं।
असंगठित कामगारों को भी योजनाओं का फायदा
रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक और दूसरे असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इनके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, परिवहन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। श्रमिकों की शिकायतों के निपटारे के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और समितियां बनाई जाएंगी। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य प्रावधान और नियम
- 24 घंटे कामकाज: व्यावसायिक संस्थान, मॉल और होटल रात-दिन खुले रह सकते हैं, बशर्ते कर्मचारियों की ड्यूटी तय समय और शिफ्ट के अनुसार बदली जाए।
- गिग वर्कर्स: पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है।
- कार्य सुरक्षा: श्रमिकों के स्वास्थ्य, कल्याण, और सुरक्षित कार्यस्थल के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है।
- पारदर्शिता: नियोक्ता और श्रमिक के बीच संबंधों को बेहतर बनाने और नियमों को आसान बनाने के लिए डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया गया है।

