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Maha Shivratri 2025 | भगवान शिव को क्यों चढ़ता है भांग, धतूरा और बेलपत्र ?

Shiv Ji Ko Bhang Kyon Chadhaya Jata Hai

Shiv Ji Ko Bhang Kyon Chadhaya Jata Hai

Shiv Ji Ko Bhang Kyon Chadhaya Jata Hai | नमो नमः शंकराय – हर हर महादेव! सृष्टि के संरक्षक, संहारक और पालक, भोले बाबा की महिमा अपार है। उनके हर रूप में एक गहरा संदेश छिपा है, हर अर्पण में एक अलौकिक रहस्य। शिव, जिनकी जटाओं में बहती गंगा है, जिनके कंठ में सागर का हलाहल है, जिनके त्रिनेत्र में समाया सम्पूर्ण ब्रह्मांड है। वे स्वयं काल भी हैं और महाकाल भी। शिव की महिमा अपरंपार है, और उनकी आराधना के पीछे छिपे हैं गूढ़ रहस्य। आज, महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर, हम आपके साथ साझा करेंगे उस अनंत सत्य को, जो भांग, धतूरे और बेलपत्र के अर्पण के पीछे छिपा है। आइए, इस आध्यात्मिक यात्रा में डूब जाएं और जानें कि भगवान शिव को ये चीजें क्यों इतनी प्रिय हैं।

सृष्टि का आदि और अंत, सब कुछ उनके अधीन है। भोले भंडारी, जो नीलकंठ कहलाए, उन्होंने वो कर दिखाया जो कोई और नहीं कर सकता था। जब समुद्र मंथन हुआ, देवताओं और असुरों के बीच अमृत की चाह में एक भयानक विष प्रकट हुआ – हलाहल। यह विष इतना प्रचंड था कि उसकी गर्मी से सारी सृष्टि जलने को तैयार थी। देवता भयभीत, असुर व्याकुल, और सृष्टि संकट में। तब भगवान शिव ने आगे कदम बढ़ाया। उन्होंने उस प्रलयंकारी विष को अपने कंठ में समा लिया। वो विष, जो सृष्टि को भस्म कर सकता था, उसे भोले बाबा ने अपने भीतर रोक लिया। उनका कंठ नीला पड़ गया, और वे नीलकंठ कहलाए। लेकिन उस विष की तपन को शांत करना था। तब देवताओं ने भगवान के शीश पर ठंडक देने वाली चीजें अर्पित कीं – भांग, धतूरा, आक और बेलपत्र। ये सभी प्रकृति के वो उपहार हैं, जो शीतलता देते हैं, जो मन और तन को शांत करते हैं। तभी से ये परंपरा शुरू हुई। सावन के पवित्र सोमवार हों या महाशिवरात्रि का दिव्य पर्व, भक्त आज भी शिवलिंग पर ये चीजें अर्पित करते हैं। पर क्या यह केवल एक रिवाज है? नहीं, इसके पीछे छिपा है जीवन का गहरा संदेश।

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