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Shiprocket IPO: ग्रोथ के साथ मुनाफे का रिस्क, पैसा लगाने से पहले जाने डिटेल…

Shiprocket IPO: The challenge of balancing growth with profitability—get the full picture.Shiprocket IPO: The challenge of balancing growth with profitability—get the full picture.

Shiprocket IPO: The challenge of balancing growth with profitability—get the full picture.

ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक प्लेटफार्म Shiprocket का आईपीओ बुधवार 12 अगस्त को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। कंपनी इस इशू से कुल 1617 करोड रुपए जताने की प्लानिंग में है। इसमें 885 करोड रुपए का फ्रेश इशू और 732 करोड रुपए का ऑफर फॉर सेल भी शामिल है। आईपीओ को लेकर मुख्य चर्चा कंपनी की तेज रेवेन्यू ग्रोथ और अभी जारी ग्रोथ पर की जा रही है।

Shiprocket IPO का प्राइस बैंड और इश्यू साइज क्या है

शिपरॉकेट आईपीओ का प्राइस बैंड 92 रुपए से 97 रुपए प्रति शेयर है। कंपनी ने आईपीओ से पहले एंकर के निवेशक से करीब 727 पॉइंट 41 करोड रुपए जुटाए हैं। जिसमें गोल्डमैन sachs,HDFC Mutual Fund और SBI Mutual Fund जैसे इंस्टीट्यूशल निवेश करने वाले लोगों की भागीदारी दिख रहीहै। इसका फ्रेश इशू मिलने से वाली राशि का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी के इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार मार्केटिंग और कर्ज से जुड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए ही किया जाना है। वही ऑफर फॉर सेल से मिलने वाली राशि कंपनी को नहीं बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेश करने वाले लोगों को ही मिलेगी।

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Shiprocket IPO में revenue growth है मजबूत

कंपनी के फाइनेंशियल आंकड़ों के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2024 से 2026 के बीच रेवेन्यू करीब 24 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़कर 2024 करोड रुपए हो गया है। इस दौरान बिजनेस की ग्रोथ करीब 17% देखने को मिली जबकि इमर्जिंग बिजनेस में 52.6% की तेज वार्षिक वृद्धि देखी जा रही है। इमर्जिंग सेगमेंट में भारी कार्गो क्रॉस बॉर्डर शिपिंग मार्केटिंग और अन्य समाधान देखने को मिल रहे हैं।

इसका core बिजनेस पहले से ऑपरेटिंग प्रॉफिट कमा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़कर करीब 186.6 करोड रुपए हो गया है। साथी ऑपरेटिंग कैश फ्लो फाइनेंशियल ईयर 2024 की 2016 करोड रुपए के आउटफ्लो से सुधार कर फाइनेंशियल के 2026 में 52.6 करोड रुपए पर पॉजिटिव दिख रहा है। यह कंपनी के कैश जनरेशन में एक सुधार का संकेत है।

अब मुनाफे की कमी अभी बड़ी चुनौती

Shiprocket की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनी अभी कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट नहीं कमा पा रही है फाइनेंशियल ईयर 2026 में इसका नेट लॉस करें 79.2 करोड रुपए रहा। कंपनी के इमर्जिंग बिजनेस तेजी से बढ़ते जा रहे हैं लेकिन इनमें निवेश होने के कारण अभी प्रॉफिटेबिलिटी नहीं देखने को मिलीहै। इसलिए रेवेन्यू बढ़ाने के बावजूद भी बॉटम लाइन परफॉर्मेंस पर अभी दबाव बना हुआहै।

यही कारण है कि सिर्फ रॉकेट का मूल्यांकन पारंपरिक तरीके P/E की बजाय प्राइस टू सेल के आधार पर देखना सबसे ज्यादा परफेक्ट है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आईपीओ के इंप्लायड मार्केट केपीटलाइजेशन पर इसका फाइनेंशियल ईयर प्राइस टू सेल मल्टीप्ल 3.5 गुना है जबकि प्रॉफिटेबल यूनिकॉमर्स करीब 4.7 गुना पर बिजनेस करता दिख रहा है।

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अब इसका निवेशकों पर क्या असर?

बाजार के मुताबिक Shiprocket का आईपीओ कहानी मुख्य रूप से ग्रंथ और फ्यूचर की प्रॉफिटेबिलिटी पर ही टिकी हुई है। कंपनी का बिजनेस धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है लेकिन इमर्जिंग सेगमेंट को लगातार प्रॉफिटेबल बनाना आगे एक चुनौती ही होने वाला है। हालांकि आईपीओ के समय कंपनी का नेट प्रॉफिट पॉजिटिव नहीं है इसलिए वैल्यूएशन को लेकर रिस्क बना रहता है। शिप रॉकेट के शेयेर अभी भी लिस्टेड नहीं किए गए हैं इसलिए क्लोजिंग प्राइस इंट्राडे हाई लो और मार्केट कैप मूवमेंट पर उपलब्ध नहीं है। आईपीओ 12 से 14 अगस्त 2026 तक ही खुला रहेगा आगे कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी कैश फ्लो और इमर्जिंग बिजनेस की परफॉर्मेंस निवेश करने वाले लोगों के लिए एक प्रमुख संकेतक की तरह रहेंगे। यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से है इसको निवेश की सलाह नहीं समझे।

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