Shibu Soren Padma Bhushan Award Controversy: पद्म भूषण भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो देश के लिए ‘उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा’ के लिए दिया जाता है। यह किसी भी क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए व्यक्तियों को दिया जाता है. यह भारत रत्न और पद्म विभूषण के बाद, सर्वोच्च सम्मानों की श्रृंखला में तीसरे स्थान पर आता है। लेकिन केंद्र सरकार इस बार यह सम्मान उस व्यक्ति को देने जा रही है जिनके भ्रष्टाचार के कारनामे, भ्र्ष्ट लोगों के लिए मिसाल है. उनका नाम है शिबू सोरेन (Shibu Soren) जो झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक, झारखंड में लंबे समय तक रहे मुख्य मंत्री और वर्तमान मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन के पिता हैं.
सोशल मीडिया में सरकार द्वारा जारी पद्म सम्मान 2026 की लिस्ट (Padma Awards 2026 List) का विरोध हो रहा है. वैसे इस लिस्ट में 131 नाम हैं मगर सिर्फ एक नाम ‘शिबू सोरेन’ लोगों की आँखों में खटक रहा है। सोशल मीडिया में लोग केंद्र सरकार को कोस रहे हैं और पूछ रहे हैं कि जिस नेता पर भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज थे और जिस नेता के भ्रष्ट्राचार की कहानियाँ आप झारखंड में चुनावी सभा के दौरान जनता को सुनाते थे उनके निधन के बाद ऐसा क्या बदल गया कि वे एक भ्रष्ट नेता से ‘उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा’ देने वाले जननायक बन गए?
सोशल मीडिया में पॉपुलर पत्रकार और लेखक अजीत भारती ने इस मामले में केंद्र सरकार पर कटाक्ष कसते हुए कहा है कि- पद्मश्री को ‘पीपल्स पद्मा’ बना कर, भूषण, विभूषण और भारत रत्न को जितना राजनैतिक भाजपा ने बनाया, उसका सानी नहीं है। पवार, मुलायम, कर्पूरी ठाकुर, अच्युतानंदन, शिबू सोरेन आदि ने राजनीति में सकारात्मक से अधिक नकारात्मक योगदान दिया। पता नहीं कौन सा कीड़ा काटा है इन लोगों को!
इतना ही नहीं लेखक और स्वराज्य के कंसल्टिंग एडिटर आनंद रंगनाथन ने भी शिबू सोरेन को पदम् भूषण दिए जाने पर कटाक्ष कसा है. उन्होंने लिखा- शिबू सोरेन ने कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। मामला इतना स्पष्ट था कि एक न्यायाधीश ने उनकी रिश्वत पर कर लगाने का आदेश भी दिया था। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया क्योंकि रिश्वत संसदीय विशेषाधिकार के अंतर्गत आती है।आज गणतंत्र दिवस पर श्री सोरेन को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है।
कई X यूजर्स ने इस फैसले का विरोध करते हुए लिखा कि- अजमल कसाब को भी किसी दिन यह सम्मान मिल सकता है.
बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने लिखा कि- आख़िरकार मोदी जी ने झामुमो के संस्थापक आदरणीय शिबू सोरेन जी को पद्म भूषण देकर सम्मानित किया । भाजपा वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर ही लोगों का सम्मान करती है । काश झामुमो और कांग्रेस बदले की भावना से उपर उठकर झारखंड का विकास करती,जानकारी के लिए गुरु जी को हमेशा जेल कांग्रेस ने ही दिया।
मगर X ने निशिकांत दुबे का फैक्ट चेक कर दिया। X के Grok Ai ने बताया कि- माननीय मंत्री जी श्री सोरेन के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को भूल गए प्रतीत होते हैं और एक दोषी व्यक्ति की प्रशंसा कर रहे हैं।
लोकपाल ने सीबीआई को जम्मू-कश्मीर महिला गठबंधन (जेएमएम) प्रमुख शिबू सोरेन की बेनामी संपत्तियों की 6 महीने के भीतर जांच करने का निर्देश दिया
नेशनल सिक्योरिटी अफेयर एनालिस्ट दिव्य कुमार सोती ने भी इसका विरोध करते हुए लिखा- अगर मुझे सही याद है तो शिबु सोरेन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के पहले सांसद थे जो संसद में नोट के बदले वोट देते हुए पकड़े गए थे। ऐसी महान उपलब्धि के लिए क्या भीम रिपब्लिक में पद्म भूषण नहीं बनता है? मेरी तो मांग है कि शिबु सोरेन जी की प्रतिमा संसद के प्रांगण में स्थापित की जाए ताकि सभी माननीय सांसद उनके कृतित्व से प्रेरणा प्राप्त करते रहें। जय भीम जय भारत
हर जगह शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने का विरोध किया जा रहा है. चूंकि ने NDA सरकार का फैसला है इसी लिए जो भाजपाई झारखंड चुनावों में शिबू सोरेन की करतूतों का विरोध कर वोट मांगते थे वो अब शिबू सोरेन को मसीहा बता रहे हैं.
शिबू शोरेन से जुड़े विवाद
1974-1975: कुड़को/चिरुडीह दोहरे/सामूहिक हत्या मामला (Chirudih Massacre)
एक बकरे की बलि/हत्या को लेकर विवाद के बाद हिंसा हुई, जिसमें 2 से 11 लोगों की मौत का आरोप लगा। शिबू सोरेन पर भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप था।
- 1974/1975: घटना हुई।
- 2004: गिरफ्तारी वारंट जारी, गिरफ्तारी हुई।
- 2008: गिरिडीह कोर्ट में बरी।
- 2010: अंतिम फैसले में पूरी तरह बरी।
JMM सांसद घूसकांड
शिबू सोरेन से जुड़ा सबसे प्रमुख भ्रष्टाचार विवाद 1993 का JMM सांसद घूसकांड (JMM Bribery Scandal या Cash-for-Votes Scandal) है। यह मामला नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार को अविश्वास प्रस्ताव से बचाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने से जुड़ा था।
- 1993 (जुलाई): लोकसभा में पी.वी. नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। JMM के 4 सांसदों (शिबू सोरेन, सूरज मंडल, साइमन मरांडी और शैलेंद्र महतो) ने कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया, जिससे सरकार बच गई। आरोप था कि इसके बदले रिश्वत ली गई।
- 1993 (जुलाई के बाद): JMM सांसद शैलेंद्र महतो ने खुलासा किया कि उन्हें और अन्य JMM सांसदों को 50-50 लाख रुपये की रिश्वत दी गई थी। उन्होंने संसद में (अटल बिहारी वाजपेयी के सामने) यह स्वीकार किया। खुलासे में कहा गया कि सूटकेस में नोट्स फार्महाउस आदि जगहों पर दिए गए।
- 1993-1996: इस खुलासे के बाद CBI जांच शुरू हुई। CBI ने केस दर्ज किया।
- 5 सितंबर 1996: CBI ने दिल्ली में शिबू सोरेन सहित आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
- 2000 के दशक में ट्रायल: दिल्ली की CBI स्पेशल कोर्ट में लंबा ट्रायल चला।
- 2007: ट्रायल कोर्ट ने शिबू सोरेन को दोषी ठहराया और सजा सुनाई (कुछ रिपोर्ट्स में आजीवन कारावास जैसी बातें, लेकिन मुख्य रूप से दोषसिद्धि)। एक जज ने यहाँ तक कहा कि रिश्वत पर टैक्स लगाया जाए (क्योंकि यह “आय” मानी गई)।
- 2007 (22 अगस्त): सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। SC ने कहा कि संसद में वोट/स्पीच के लिए रिश्वत लेना सांसदों की प्रतिरक्षा (immunity) के दायरे में आता है (Article 105(2) के तहत)। इसलिए शिबू सोरेन सहित JMM सांसदों पर ट्रायल नहीं चलेगा। वे बरी हो गए।
- बाद के वर्षों में: यह फैसला 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने ओवररूल कर दिया (नोट फॉर वोट मामले में), लेकिन शिबू सोरेन के केस पर इसका रेट्रोएक्टिव प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि वे तब तक बरी हो चुके थे।
यह मामला शिबू सोरेन के राजनीतिक करियर पर सबसे बड़ा दाग रहा, जिसके कारण उन्हें “घूसखोरी” के आरोपों से जोड़ा जाता रहा। हालांकि, अंत में सुप्रीम कोर्ट की वजह से कानूनी रूप से वे बच गए।
1994-1995: निजी सचिव शशीनाथ झा हत्या मामला (Murder of Private Secretary Shashi Nath Jha)
उनके निजी सचिव की हत्या का आरोप, लाश दिल्ली के पास मिली थी
- 1994/1995: हत्या हुई।
- 2004-2006: दिल्ली कोर्ट में ट्रायल।
- 2006: दिल्ली जिला कोर्ट ने दोषी ठहराया, आजीवन कारावास की सजा।
- 2007: दिल्ली हाई कोर्ट ने बरी कर दिया (सबूतों की कमी)।
अन्य छोटे/संबंधित विवाद
- 2004-2010 के बीच कई बार जेल गए या कोर्ट में पेशी के लिए हाजिरी लगाई।।
- 1970 के दशक में “गैर-आदिवासियों को बाहर निकालो” जैसे आंदोलन से जुड़े आरोप (1975 के आसपास)।
- कई बार मुख्यमंत्री रहते इस्तीफा देना पड़ा (2005, 2010 आदि में हत्या केस या फ्लोर टेस्ट से जुड़े)
शायद शिबू सोरेन की ‘उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा’ यही रही होगी। वैसे बीजेपी ने कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव को भी इसी सम्मान से नवाजा था.

