रीवा: जम्मू-कश्मीर के बेहद चुनौतीपूर्ण और जानलेवा माहौल में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के खिलाफ अदम्य साहस और अद्वितीय वीरता का परिचय देने वाले सीआरपीएफ (CRPF) के जांबाज जवान संजय तिवारी को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के प्रतिष्ठित ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया है। इस सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे जाने के बाद, बुधवार को जब विंध्य का यह वीर सपूत अपने गृह जिले रीवा के रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो वहां पूरा शहर उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। रीवा जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत डेलही गांव के निवासी संजय तिवारी का रेलवे स्टेशन पर किसी महान विजेता की तरह भव्य और ऐतिहासिक अभिनंदन किया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप, गगनभेदी फूल-मालाओं की बौछार और ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ स्थानीय जनता ने अपने लाडले हीरो का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत किया।
गोलियां खाकर भी मोर्चे पर डटे रहे जांबाज संजय
अपने शौर्यपूर्ण और रोंगटे खड़े कर देने वाले अभियान को याद करते हुए वीर जवान संजय तिवारी ने गर्व से कहा कि उनके लिए अपनी जान से कहीं ज्यादा प्यारा यह देश है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में एक खुफिया और पुख्ता सूचना के आधार पर जब उनकी टीम ने आतंकवादियों की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया, तब आतंकियों ने अचानक उन पर अंधाधुंध और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। भारी गोलीबारी के बीच संजय अग्रिम हमला दल (फ्रंट कमांडर) का हिस्सा बनकर लगातार आगे बढ़ते रहे। इसी भीषण मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की तीन गोलियां उनकी बांह, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों को चीरती हुई निकल गईं। गंभीर रूप से घायल होने और शरीर से भारी मात्रा में खून बहने के बावजूद इस जांबाज ने अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी और रेंगते हुए जवाबी कार्रवाई जारी रखी तथा लश्कर के एक खूंखार आतंकवादी को मार गिराया।
विंध्य और पूरे मध्य प्रदेश का बढ़ाया मान
इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर पर रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा भी वीर जवान की अगवानी करने पहुंचे। उन्होंने संजय तिवारी की अटूट राष्ट्रभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि तीन गोलियां लगने के बावजूद अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकियों का डटकर मुकाबला करने वाले संजय ने न सिर्फ पूरे विंध्य क्षेत्र बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। वह आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए देशभक्ति की एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन चुके हैं। सांसद ने भावुक होते हुए कहा कि रीवा की इस पवित्र माटी ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि यहां के बेटे मातृभूमि की रक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी बड़े से बड़े बलिदान को देने से कभी पीछे नहीं हटते।

