Shattila Ekadashi 2026 : जीवन में समृद्धि हेतु षट्तिला एकादशी पर करें तिल के ये छ: उपाय-षट्तिला एकादशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत है, जो माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें तिल (Sesame Seeds) का छह विभिन्न तरीकों से प्रयोग कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत पापों के नाश, दरिद्रता के अंत, सुख-समृद्धि की प्राप्ति तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही, यह व्रत त्याग, सेवा, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। षट्तिला एकादशी माघ कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। जानें तिल के छह प्रयोग, व्रत-पूजा विधि, दान का महत्व, पौराणिक कथा और इस व्रत से मिलने वाले आध्यात्मिक व भौतिक लाभ।
षट्तिला एकादशी का महत्व
षट और तिला का अर्थ-षट का अर्थ है छह और तिला का अर्थ तिल। अर्थात इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग करना ही षट्तिला एकादशी का मूल भाव है जो बेहद पुण्यकारी होता है।
पाप नाशक व्रत-इस दिन व्रत, जप-तप और तिल प्रयोग से जन्म-जन्मांतर के पाप और दोष समाप्त होते हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
धन और समृद्धि का कारक-षट्तिला एकादशी का व्रत दरिद्रता को दूर कर जीवन में धन, ऐश्वर्य और स्थिरता लाता है।
मोक्ष का मार्ग-यह व्रत न केवल भौतिक सुख देता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की दिशा में भी अग्रसर करता है।

षट्तिला एकादशी के 6 प्रमुख प्रयोग
स्नान – नदी ,तालाब के शुद्ध जल में तिल मिलाकर स्नान करना।
उबटन – तिल से बने उबटन को शरीर पर लगाना।
पूजा – भगवान विष्णु की पूजा में तिल का प्रयोग।
जल – तिल मिश्रित जल का सेवन।
दान – तिल का दान (सबसे महत्वपूर्ण) मन गया है।
भोजन – तिल से बने भोजन जैसे तिल-उड़द की खिचड़ी,लड्डू चिक्की आदि खाना।
व्रत और पूजा विधि और व्रत के नियम
विशेष नियम – इस दिन की कोई भी तरह के वाद – विवाद ,झूठ ,फरेब , चोरी – मक्कारी ,विवाद सहित मांस, मदिरा नहीं करना चाहिए जबकि इस विशेष दिन कांसे के बर्तन का प्रयोग भूल कर भी नहीं करना चाहिए। साथ ही साथ नकारात्मकता से भी दूर रहें।
पूजा विधि-प्रात स्नान कर व्रत का संकल्प लेकर ही व्रत करना फलदाई होता है। इस दिन भगवान विष्णु की षोडशोपचार यानि 16 वस्तुओं से पूजा करें जैसे – फूल,तिल,गुड़,पंचामृत ,गंगाजल ,दूध,गाय के दूध से बना शुद्ध घी, सफ़ेद मिठाई ,केला ,श्रीफल ,हल्दी , चन्दन ,जनेऊ ,पीला वस्त्र ,पंचमेवा और पान ,लोंग- इलायची व सुपाड़ी आदि से पूजन करना चाहिए।
विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और आरती करें
दान का महत्व-इस दिन तिल, अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान करें ,दान बिना फल की इच्छा के करना सर्वोत्तम माना गया है अतः ऐसे मात्रा कल्याण की समर्पित भावना से ही करना चाहिए।
पारण- इस दिन यदि एकादशी का व्रत किया है तो व्रत का पारण द्वादशी तिथि को सूर्योदय पूजा के बाद करें ये अत्यंत पुण्यकारी होगा।
षट्तिला एकादशी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक ब्राह्मणी भगवान विष्णु की भक्त तो थी, परंतु दान-पुण्य नहीं करती थी, जिससे उसकी कुटिया सदैव सूनी रहती थी। भगवान विष्णु ने देव कन्याओं के माध्यम से उसे षट्तिला एकादशी व्रत और दान का महत्व समझाया। ब्राह्मणी ने विधिपूर्वक व्रत और दान किया, जिससे उसकी कुटिया धन-धान्य से भर गई। इस कथा से स्पष्ट होता है कि भक्ति के साथ दान भी आवश्यक है।
निष्कर्ष (Conclusion)-षट्तिला एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को शुद्ध, संतुलित और समृद्ध बनाने का आध्यात्मिक मार्ग है। तिल के छह प्रयोग हमें संयम, दान, सेवा और त्याग की शिक्षा देते हैं अतः जो भक्त श्रद्धा, नियम और निस्वार्थ दान के साथ यह व्रत करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा, सुख-समृद्धि और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
