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शशि थरूर का दावा- SIR से केरल में कांग्रेस को फायदा, बंगाल में उठाए सवाल

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि केरल में वोटर लिस्ट से डुप्लिकेट नाम हटने का फायदा कांग्रेस को मिला। वहीं पश्चिम बंगाल में उन्होंने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

केरल में कांग्रेस को फायदा मिलने का दावा

तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा,

“खासकर केरल में मुझे लगता है कि कांग्रेस को नाम हटाने से फायदा हुआ क्योंकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) लंबे समय से डबल नाम चढ़ाने, ट्रिपल नाम चढ़ाने, चार बार नाम चढ़ाने में माहिर थी. चार अलग-अलग बूथों पर एक ही लोग वगैरह. ऐसा होता था. और इसलिए उन्हें SIR ने हटा दिया, और जैसा कि आपने कहा, केरल और तमिलनाडु में बहुत कम अपीलें हुईं. लेकिन बंगाल में, इसमें कोई शक नहीं है कि 34 लाख अपीलें हुईं. और ये 34 लाख लोगों ने 34 लाख फॉर्म भरे हैं. और उनमें से केवल कुछ सौ पर ही सुनवाई हुई है.”

थरूर का कहना है कि वोटर लिस्ट से एक से ज्यादा बार दर्ज नाम हटने से चुनाव प्रक्रिया ज्यादा साफ हुई और इसका फायदा कांग्रेस को मिला।

बंगाल में लाखों वोटरों को लेकर जताई चिंता

शशि थरूर ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, जिसके बाद लाखों लोगों ने अपील की। उनका कहना है कि कई मामलों में समय पर सुनवाई नहीं हो सकी, जिससे लोग वोट देने से वंचित रह गए।

उन्होंने कहा,

“पश्चिम बंगाल का मामला देखिए. 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. इनमें से 34 लाख जिंदा लोगों ने अपील की और कहा कि वे वैध वोटर हैं. नियम ये था कि हर केस की अलग-अलग सुनवाई हो. लेकिन वोटिंग से पहले सिर्फ कुछ सौ मामलों का ही निपटारा हो पाया.”

इसके साथ ही उन्होंने कहा,

“आज भी करीब 31-32 लाख लोगों के मामले लंबित हैं. हो सकता है कि आने वाले समय में उन्हें सही वोटर माना जाए. लेकिन वो इस चुनाव में वोट डालने का मौका खो चुके हैं.”

BJP की जीत के अंतर पर भी उठाया सवाल

थरूर ने कहा,

“BJP बंगाल में करीब 30 लाख वोटों के अंतर से जीती. अब आप बताइए, क्या ये पूरी तरह निष्पक्ष और लोकतांत्रिक है? यही सवाल मैं पूछ रहा हूं.”

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फर्जी या मृत वोटरों के नाम हटाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा,

“मुझे फर्जी, मृत या पलायन कर चुके वोटरों के नाम हटाने से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन अगर असली वोटरों को ही वोट डालने से रोक दिया जाए, तो सवाल उठेंगे.”

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