धर्म के आगे झुकी सत्ता! प्रशासन ने मांग ली शंकराचार्य से माफ़ी, 1 फरवरी को स्नान करेंगे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

Shankaracharya Avimukteshwar : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में धर्म और सत्ता के बीच विवाद सुलझ गया है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और माघ मेले के अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद अब खत्म होने वाला है। माघ मेला प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आगे झुक गया और उनकी दोनों शर्तो को मान लिया है। अब 1 फ़रवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्नान करेंगे। 

प्रशासन ने मानी शंकराचार्य की दोनों शर्ते

गुरुवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में धर्म और सत्य की जीत हुई। प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने अपनी गलती मान ली है। शासन के बड़े अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि प्रयागराज के अधिकारी शंकराचार्य से माफी मांगे। स्वामी जी ने माफ करने के लिए दो शर्त रखी है, जिसे मान लिया गया है।

1 फ़रवरी को शंकराचार्य करेंगे माघी स्नान 

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन बड़े धूमधाम से संगम में स्नान करेंगे। शंकराचार्य 31 जनवरी की शाम या 1 फरवरी की सुबह वापस प्रयागराज आएंगे। उनके साथ अधिकारी भी होंगे, जो उन्हें सम्मान के साथ लाएंगे। यह स्नान बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि अब प्रशासन भी उनके साथ है। 

लखनऊ से जाएंगे दो बड़े अधिकारी साथ 

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया। प्रयागराज के अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि विवाद जल्दी सुलझाया जाए। अब लखनऊ से दो बड़े अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थता कर रहे हैं। प्रशासन अपनी गलती मान रहा है और माफी भी मांगेगा। बता दें कि माघी पूर्णिमा का स्नान बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह माना जा रहा है कि यह ‘प्रायश्चित स्नान’ और ‘विजय स्नान’ है, जिसमें प्रशासन भी अपनी गलतियों को सुधारने के लिए उनके साथ मौजूद रहेगा।

18 जनवरी को शुरू हुआ था विवाद 

बता दें कि विवाद तब शुरू हुआ था जब मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को नोटिस भेजा था। इसमें उनके पद को लेकर सवाल किए गए थे। इससे संत समाज में रोष फैल गया था। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपमानित किया गया था। जब शंकराचार्य की पालकी को संगम जाने से रोका गया था। उस समय पुलिस ने उनके शिष्यों और बटुकों के साथ बदसलूकी की थी। उस दिन मेला प्रशासन ने उनके वाहन और पालकी को संगम जाने से रोक दिया था। इससे स्वामी जी बहुत आहत हुए और उन्होंने 11 दिन ठंड में भूखे रहकर धरना दिया। इससे वे नाराज हो गए थे और 28 जनवरी को वह प्रयागराज छोड़कर वाराणसी चले गए थे। उन्होंने कहा था कि प्रयागराज में संतों का सम्मान नहीं रह गया है। 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की दो शर्ते क्या हैं?

पहली शर्त : शंकराचार्य को जो नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें वापस लिया जाए। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित में माफी भी देनी होगी। स्वामी जी का कहना है कि यह उनकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि सनातन धर्म और पीठों की गरिमा की रक्षा का मामला है। 

दूसरी शर्त : 1 फरवरी को होने वाले स्नान के समय उन्हें सम्मान और प्रोटोकॉल दिया जाए। इसमें संगम तक पालकी ले जाने की अनुमति, सुरक्षा का बंदोबस्त और वैदिक मंत्रोच्चार शामिल है। प्रशासन ने भरोसा दिया है कि इस बार कोई रुकावट नहीं होगी और उन्हें सम्मान के साथ स्वागत किया जाएगा। 

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