Shankaracharya On CM Yogi : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ जो अमानवीय व्यवहार हुआ, उससे पूरे देश के संतों और सनातनियों को गहरा धक्का लगा है। योगी सरकार से धर्म व सम्मान की लड़ाई लड़ रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार को भारी मन से प्रयागराज छोड़ दिया और काशी के लिए प्रस्थान कर गए। जाते-जाते उन्होंने कहा कि आज हम प्रयागराज से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज छोड़कर जा रहे हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज बुधवार को पत्रकाराें से वार्ता कर रहे थे। अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। धार्मिक नगरी संगम से प्रस्थान करते समय आज शब्द साथ नहीं दे रहे, स्वर बोझिल है। प्रयाग की धरती पर यहां पर जो कुछ घटित हुआ, उसने हमारी आत्मा को झकझोर दिया है। संगम में हम बिना स्नान किये यहां से विदा ले रहे हैं।
सरकारी ‘रेवड़ियां’ लेने वाले संत नहीं – अविमुक्तेश्वरानंद
माघ मेला को छोड़कर जाते समय अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने योगी सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और धर्म जगत में भूचाल ला दिया है। पिछले 10 दिनों से अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे शंकराचार्य ने साफ कर दिया कि वह अपमान सहकर सरकारी ‘रेवड़ियां’ लेने वाले संत नहीं हैं। उन्होंने इस घटना को अपने जीवन का सबसे बड़ा दुख बताया है और अब गेंद सनातनी जनता के पाले में डाल दी है। उन्होंने कहा, “हम प्रयागराज छोड़कर जा रहें हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज छोड़कर जा रहे हैं।”
‘मुझे लालच दे रही थी योगी सरकार – अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के जाने से पहले प्रशासन ने उन्हें मनाने की आखिरी कोशिश की और कुछ प्रस्ताव सामने रखे। लेकिन शंकराचार्य ने इन प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन अपनी गलती मानने या पछतावा करने के बजाय उन्हें लोभ-लालच देकर चुप कराना चाहते हैं। प्रशासन ने प्रस्ताव दिया था कि वे शंकराचार्य को पालकी में ले जाकर संगम स्नान कराएंगे और भविष्य के लिए चारों शंकराचार्यों के लिए एक विशेष नियम (SOP) बनाएंगे। इस पर बिफरते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूछा कि अगर पालकी में जाना गलत था तो अब क्यों ले जाना चाहते हो? और अगर नियम पहले बन सकते थे तो क्यों नहीं बनाए गए?
अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने साफ कहा कि प्रशासन मारपीट और बटुक शिष्यों के अपमान पर बात करने के बजाय सिर्फ सुविधाएं देकर मामला रफा-दफा करना चाहता है और मुझे फंसाना चाहती है।
शिष्यों के अपमान पर प्रशासन मौन क्यों?
बता दें कि ये पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था, जब संगम स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को रोक दिया गया और उनके बटुक शिष्यों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रशासन अभी भी अपनी अकड़ में है और अपराध स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने कहा, “मारपीट करवाकर और अपमान सहकर अगर मैं सरकारी सुविधाएं ले लूं, तो यह मेरी अंतरात्मा के साथ धोखा होगा।” अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने प्रशासन की इस ‘अकड़’ को देखते हुए ही उन्होंने तुरंत माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का फैसला किया। उनका मानना है कि सरकार की नियत में खोट है और वे केवल सरकारी रेवड़ी बांटकर उन्हें अपने जाल में फंसाना चाहते हैं।
योगी सरकार पर तीखा हमला और जनता की अदालत
इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “प्रयागराज की धरती पर उन्हें जो दुख मिला, वह उनके जीवन का सबसे बड़ा दुख है। इसके सामने पुराने सभी दुख छोटे हो गए हैं।” उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “सनातन धर्मियों को जो यह चोट पहुंचाई गई है, इसकी भरपाई अब कौन सा नेता या कौन सी पार्टी करेगी, यह तो समय ही बताएगा।”
यूपी विधानसभा चुनाव पर कह दी बड़ी बात
उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की जीत और हार के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि असली निर्णय सनातन धर्म की जनता करेगी। जब जनता अपना फैसला सुनाएगी, तभी असली हार-जीत का पता चलेगा। मीडिया से बातचीत के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तुरंत काशी के लिए प्रस्थान कर गए।
अब सवाल यह उठता है कि क्या यूपी सरकार इस धार्मिक गतिरोध को सुलझाने में विफल रही? क्या शंकराचार्य की यह नाराजगी आने वाले समय में किसी बड़े सियासी या धार्मिक उलटफेर का संकेत है? फिलहाल, प्रयागराज से काशी तक की यह यात्रा सिर्फ एक संत का प्रस्थान नहीं, बल्कि सत्ता और धर्म के बीच सत्य की लड़ाई छेड़ गई है।

