शहडोल। जिले के ब्यौहारी विकासखंड के पपौंध थाना क्षेत्र स्थित सरसी गांव के पास बाणसागर बैक वाटर में बना सरसी आईलैंड का संचालन मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से किया जा रहा है, यहां पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बुनियादी इंतजामों का अभाव है, जिसमें रेस्क्यू टीम, प्रशिक्षित गोताखोर और पुलिस के पास अपनी नाव न होना शामिल है।
क्रूज हादसे के बाद जांच
जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार शाम क्रूज हादसे के बाद सरसी आईलैंड की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई, तो यहां किसी भी प्रकार का रेस्क्यू दल मौजूद नहीं है। यदि कोई नाव दुर्घटना का शिकार होती है, तो तत्काल बचाव के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर नाव चालक ही बचाव कार्य करते हैं, जिन्हें सीमित प्रशिक्षण दिया गया है। एसडीईआरएफ की 8 सदस्यीय टीम शहडोल मुख्यालय में तैनात है, जो सरसी आईलैंड से लगभग 125 किलोमीटर दूर है। ऐसे में किसी बड़े हादसे की स्थिति में राहत और बचाव दल को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग सकता है।
5 नावें
आईलैंड प्रबंधन के पास कुल 5 नावें हैं, जिनमें एक वाटर स्कूटर और 18 लोगों की क्षमता वाली ‘जलपरी’ नाव है। एक नाव हमेशा स्टैंडबाय में रखी जाती है। सरसी आईलैंड तक पहुंचने के लिए इटमा (लगभग 7 किमी), मार्कण्डेय (लगभग 4 किमी) और काढ़े प्वाइंट (2 से 2.5 किमी) से नावें संचालित होती हैं। ये सभी मार्ग जलमार्ग हैं, जिससे आपात स्थिति में राहत दल या पुलिस के पहुंचने में देरी होना तय है।
सरसी आईलैंड पर्यटन
- भगवान भरोसे सुरक्षा: पर्यटकों को सैर कराने के लिए बोटिंग की सुविधा तो है, लेकिन किसी भी आपातकालीन स्थिति (जैसे नाव पलटना) से निपटने के लिए रिसॉर्ट या स्थानीय प्रशासन के पास कोई विशेष रेस्क्यू टीम (Rescue Team) या गोताखोर (Divers) उपलब्ध नहीं हैं।
- 125 किलोमीटर दूर से रेस्क्यू: यदि कोई दुर्घटना होती है, तो रेस्क्यू टीम को 125 किलोमीटर की दूरी से बुलाया जाना पड़ता है, जिससे तत्काल बचाव कार्य असंभव हो जाता है।
- निजी नावों पर निर्भरता: पपौंध पुलिस ने स्वीकार किया है कि वे पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध निजी नावों पर निर्भर हैं।
- जलमार्ग से संपर्क: इस आईलैंड तक पहुंचने का एकमात्र साधन मोटर बोट है। शाम 5:30 बजे के बाद बोट सेवा बंद हो जाती है।
- प्रशासनिक लापरवाही: जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसे के बाद भी यहाँ सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए।

