ट्रंप की चाटुकारिता में फंसे शाहबाज़ शरीफ! फिलिस्तीन को दिया धोखा

Shahbaz Sharif Donald Trump Board of Peace: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने गुरुवार को दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की अगुवाई वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के चार्टर पर हस्ताक्षर कर दिए। यह बोर्ड गाजा में शांति स्थापित करने और पुनर्वास के नाम पर बनाया गया है, लेकिन इसमें फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व (Palestinian Representation) शून्य है। इजराइल और अब्राहम समझौते (Abraham Accords) करने वाले देशों को शामिल किया गया है। इस कदम से शहबाज शरीफ अपने ही देश में घिर गए हैं। विपक्षी पार्टियां इसे ‘विनाशकारी फैसला’ बता रही हैं और सरकार पर ‘ट्रंप की गुड बुक्स’ में रहने की कोशिश का आरोप लगा रही हैं।

पाकिस्तान ने ट्रंप को खुश करने के लिए क्या-क्या किया?

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने ट्रंप को जंग रोकने का पूरा क्रेडिट दिया। ट्रंप को पीस प्राइज (Peace Prize) के लिए नॉमिनेट किया। मिनरल रिजर्व्स (Mineral Reserves) को ट्रंप के सामने सेल्समैन की तरह परोसा। लेकिन ये सब करने के बावजूद ट्रंप ने पाकिस्तान की वीजा प्रोसेस (Visa Process) रोक दी और 75 देशों की लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल कर लिया। अब पाकिस्तानी नागरिकों को अमेरिकी वीजा मिलना मुश्किल हो गया है।

बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

ट्रंप ने सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना में इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। बोर्ड का चार्टर ट्रंप को अत्यधिक शक्तियां देता है – सदस्यों को शामिल करने-हटाने का अधिकार, वीटो पावर और इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) पर नियंत्रण। बोर्ड में शामिल 8 इस्लामिक देश हैं – कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और UAE। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने दोहा में संयुक्त बयान जारी कर सहमति जताई।

पाकिस्तान में विरोध की आग

प्रसिद्ध पत्रकार जाहिद हुसैन ने इसे ‘जल्दबाजी का फैसला’ बताया। उन्होंने कहा कि यह ट्रंप की जोखिम भरी नीति का हिस्सा है। बोर्ड UN जैसी संरचना बन रहा है, लेकिन यह वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा है। हुसैन ने चिंता जताई कि पाकिस्तान ट्रंप की गुड बुक्स में रहने के लिए उनकी नीतियों का पालन कर रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या पाकिस्तान हमास को हथियार छोड़ने पर मजबूर करने के लिए तैयार है? क्या अमेरिकी जनरल के नेतृत्व में गाजा में फोर्स तैनात होगी और पाकिस्तानी सैनिकों को फिलिस्तीनी प्रतिरोध से लड़ना पड़ेगा?

विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इसे ‘नैतिक रूप से गलत’ बताया। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड फिलिस्तीनियों से उनका आत्मनिर्णय का अधिकार छीन रहा है। पाकिस्तान, जो कश्मीर पर UN प्रस्तावों पर जोर देता है, इस तरह की पहल से अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।

तहरीक-ए-तहफ्फुज के नेता मुस्तफा नवाज खोखर ने इसे ‘औपनिवेशिक परियोजना’ बताया। बोर्ड का चार्टर ट्रंप को असीमित शक्तियां देता है। खोखर ने सवाल उठाया कि अगर बोर्ड ईरान के खिलाफ कार्रवाई का फैसला करता है तो पाकिस्तान क्या करेगा? उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद को खतरनाक जिम्मेदारियों में बांध रहा है।

PTI ने मांग की है कि पाकिस्तान बोर्ड ऑफ पीस से सदस्यता वापस ले और संसद में इस मुद्दे पर बहस हो। PTI का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों को UN को मजबूत करना चाहिए, न कि नई संरचना बनानी चाहिए। पार्टी ने राष्ट्रीय जनमत संग्रह (Referendum) की भी मांग की है।

भारत से कोई शामिल नहींहस्ताक्षर समारोह में भारत से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। अमेरिका के सहयोगी यूरोपीय देश भी कार्यक्रम से दूर रहे। पहले माना जा रहा था कि 35 देश शामिल होंगे, लेकिन अंत में सिर्फ 8 इस्लामिक देशों ने हस्ताक्षर किए।ट्रंप ने कहा था कि यह बोर्ड गाजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक संघर्षों को सुलझाएगा। चार्टर के मुताबिक, 3 साल से ज्यादा सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।यह फैसला पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल उठा रहा है। फिलिस्तीनी हक और UN की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि शहबाज शरीफ इस दबाव से कैसे निपटते हैं।

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