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रीवा-सतना और चित्रकूट में बाढ़ का विकराल रूप: सीएम मोहन यादव ने किया दौरा, राहत कार्यों की समीक्षा कर दिए कड़े निर्देश

Severe flooding in Rewa-Satna and Chitrakoot.Severe flooding in Rewa-Satna and Chitrakoot.

Severe flooding in Rewa-Satna and Chitrakoot.

मध्य प्रदेश के सतना जिले के धार्मिक तीर्थस्थल चित्रकूट में 14 घंटे की लगातार मूसलाधार बारिश ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया कि पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी। मंदाकिनी और सेमरावल नदियों के उफान से आए इस भीषण संकट का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले चित्रकूट पहुंचकर प्रभावित लोगों से मुलाकात की, उनका हाल जाना, राहत सामग्री वितरित की और प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की मुस्तैदी के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, हालांकि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

इस प्रलयकारी बाढ़ के कारण चित्रकूट के कई इलाके पानी में डूब गए। रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका चौराहा, बाजार क्षेत्र, खटकाना मोहल्ला, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड जैसे प्रमुख क्षेत्र इसकी चपेट में आ गए। कई घरों और बाजारों में दो मंजिला इमारतें तक जलमग्न हो गईं, जिससे लोगों को अपनी जान बचाने के लिए छतों का सहारा लेना पड़ा। मंदाकिनी नदी के तेज बहाव में करीब 42 साल पुराना, 300 मीटर चौड़ा बड़ा पुल भी बह गया, जबकि तट की करीब 400 दुकानें और सती अनसूया व गुप्तगोदावरी जैसे प्रमुख तीर्थस्थल भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सेना के दो हेलीकॉप्टरों और एसडीआरएफ की टीमों ने मोटरबोट के जरिए मोर्चा संभाला और छतों पर फंसे लगभग 650 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर राहत शिविरों तक पहुंचाया। इस आपदा के दौरान बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाने से पूरा इलाका करीब 20 घंटे तक अंधेरे में डूबा रहा।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे थे। रीवा सर्किट हाउस में उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रीवा और सतना जिले में बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। बैठक में रीवा कलेक्टर ने बताया कि जिले में फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रकरण तैयार किए जा रहे हैं। सतना कलेक्टर ने बताया कि जिले के 6 गांवों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर अब तक 7 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि इस आपदा के समय किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सद्गुरु आश्रम और जैतवारा समेत अन्य आश्रय स्थलों पर ठहरे श्रद्धालुओं व स्थानीय नागरिकों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, कपड़े, चिकित्सा और उनके परिजनों से मोबाइल के जरिए संपर्क कराने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए।

सतना में हुई मूसलाधार बारिश का व्यापक असर पड़ोसी जिले रीवा में भी देखने को मिल रहा है, जहां उफनती तमस और अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से कुछ दिन पहले बाढ़ का कहर झेल चुके स्थानीय लोगों में एक बार फिर भारी दहशत का माहौल है। रीवा जिले की सिमरिया, जवा और त्यौंथर तहसील प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। एहतियात के तौर पर सिमरिया के पूर्वा फॉल को बंद कर दिया गया है, वहीं जवा तहसील में सितलहा और डीह पुल पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं जिससे कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया है। टंगहा नाला उफनाने के कारण जवा-पटहट-गढ़ी मार्ग पर भी आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है, निचले इलाकों में मुनादी कराई जा रही है और आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल व राहत टीमों को तैनात कर दिया गया है।

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