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सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज करते हुए तल्ख टिप्पणी की। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पूछा कि राजनीति में आने के बाद अंडों से क्यों डर लगता है? जानिए पूरा मामला।

महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटकामहुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका

महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका

भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के गलियारों में समय-समय पर ऐसी मौखिक टिप्पणियां आती हैं, जो न केवल केस के रुख को स्पष्ट करती हैं बल्कि जन-प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर तल्ख टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने सुरक्षा कारणों और अंडों से हमले की आशंका का हवाला देते हुए पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय वर्चुअल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) पेशी की अनुमति मांगी थी। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब आपने राजनीति में कदम रखा है, तो अंडों का डर कैसा?

मामला क्या है? महुआ मोइत्रा की याचिका और मांग

तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल में धार्मिक भावनाएं आहत करने और भड़काऊ टिप्पणी (हेट स्पीच) से जुड़ा एक मामला दर्ज हुआ था। यह मामला उनके द्वारा सोशल मीडिया पर की गई विवादित पोस्ट को लेकर दर्ज कराया गया था।

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सोशल मीडिया पोस्ट और हेट स्पीच केस का बैकग्राउंड

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब महुआ मोइत्रा के कथित बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि उनके बयानों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में तनाव की स्थिति पैदा हुई है।

कलकत्ता हाई कोर्ट का 14 अगस्त की पेशी का आदेश

मामला जब कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा, तो हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को राहत देते हुए 5 अक्टूबर तक किसी भी दंडात्मक या कठोर कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण दिया था। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह अनिवार्य शर्त रखी थी कि सांसद को जांच में सहयोग करना होगा और 14 अगस्त को जांच अधिकारी (IO) के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? जजों की तल्ख मौखिक टिप्पणियां

कलकत्ता हाई कोर्ट के व्यक्तिगत पेशी के आदेश को चुनौती देते हुए और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की अनुमति मांगने के लिए महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।

यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने याचिका के औचित्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

"क्या सिर्फ इसलिए कि आप एक सांसद हैं? जब आपने राजनीति में आने का फैसला कर ही लिया है तो आपको अंडों से डर क्यों लगता है? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो देश के लिए अपने सीने पर गोलियां खाई थीं. ऐसी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के सामने आनी ही नहीं चाहिए."

— जस्टिस दीपांकर दत्ता, सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस दीपांकर दत्ता की तीखी प्रतिक्रिया: स्वतंत्रता सेनानियों का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मौखिक टिप्पणी करते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और राजनेताओं के नैतिक दायित्व की याद दिलाई। जजों ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपने सीने पर गोलियां झेली थीं। ऐसे में आज के जन-प्रतिनिधि सिर्फ इसलिए जांच प्रक्रिया से छूट या विशेष रियायत की मांग नहीं कर सकते कि उन्हें विरोध प्रदर्शन या अंडों के फेंके जाने का डर है।

‘वर्चुअल पेशी केवल इसलिए कि आप MP हैं?’ – कोर्ट का कड़ा सवाल

पीठ ने महुआ मोइत्रा के वकील से सीधा सवाल पूछा कि क्या सांसद होने मात्र से उन्हें सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं में कोई विशेष छूट मिल जानी चाहिए? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत लागू होता है और जनप्रतिनिधियों को जांच एजेंसियों का सामना करने से कतराना नहीं चाहिए।

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महुआ मोइत्रा के वकील की दलीलें और अंडों के हमले की आशंका

महुआ मोइत्रा की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ के सामने सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि कानून के तहत किसी जांच अधिकारी के सामने इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल माध्यम से पेश होने का वैधानिक अधिकार मौजूद है।

पुलिस स्टेशन के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन का ब्योरा

वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि:

  1. जब महुआ मोइत्रा पिछली बार अपने संसदीय क्षेत्र स्थित पुलिस स्टेशन गई थीं, तो वहां राजनीतिक विरोधियों और उग्र भीड़ द्वारा भारी विरोध प्रदर्शन किया गया था।
  2. इस दौरान उन पर अंडे फेंके गए थे और दोबारा जाने पर फिर से अंडे और टमाटर फेंके जाने या शारीरिक हमले की धमकियां दी जा रही थीं।
  3. इसी सुरक्षा जोखिम को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत रूप से पुलिस स्टेशन जाने की बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराने का अनुरोध किया गया था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पीठ इन तर्कों से बिल्कुल सहमत नहीं हुई और टिप्पणी की कि ऐसी आधारहीन आशंकाओं के बल पर शीर्ष अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया जाना चाहिए।

याचिका की वापसी और आगे की कानूनी स्थिति

सुप्रीम कोर्ट के इस बेहद कड़े रुख और नाराजगी को देखते हुए महुआ मोइत्रा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने स्थिति को भांप लिया। उन्होंने कोर्ट से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया और याचिका को ‘वापस ली गई’ मानकर खारिज कर दिया।

कानूनी स्थिति का त्वरित सारांश

विवरणस्थिति / विवरण
याचिका स्थितिसुप्रीम कोर्ट में खारिज (वापस ली गई)
प्रभावी आदेशकलकत्ता हाई कोर्ट का निर्देश
पेशी की तारीख14 अगस्त
अंतरिम राहत5 अक्टूबर तक कोई कठोर/दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी

हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी: 14 अगस्त की व्यक्तिगत पेशी अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला ही प्रभावी रहेगा। इसके तहत टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को तय तारीख यानी 14 अगस्त को संबंधित जांच अधिकारी (IO) के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा और जांच में सहयोग करना होगा।

सुरक्षा और दुर्व्यवहार न होने के हाई कोर्ट के निर्देश

हालांकि, याचिकाकर्ता की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और अधिकारियों को कड़े निर्देश दे रखे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सांसद के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की या प्रदर्शनकारियों द्वारा उत्पीड़न नहीं होना चाहिए और पुलिस प्रशासन उनकी पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करे।

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राजनीतिक व कानूनी दृष्टिकोण से इस फैसले के मायने

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख जनप्रतिनिधियों के आचरण और कानून के क्रियान्वयन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के मामले में क्या टिप्पणी की?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि जब आपने राजनीति में आने का फैसला किया है, तो अंडों से डर क्यों लगता है? उन्होंने याद दिलाया कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाई थीं, इसलिए नेताओं को अंडों से डरकर जांच से बचने की याचिका नहीं लगानी चाहिए।

2. महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की थी?

महुआ मोइत्रा ने हेट स्पीच मामले में पुलिस जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल माध्यम) के जरिए बयान दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने सुरक्षा और अंडों के हमले की आशंका जताई थी।

3. महुआ मोइत्रा के खिलाफ क्या मामला दर्ज है?

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर सोशल मीडिया पर कथित विवादित और भड़काऊ पोस्ट डालने के संबंध में केस दर्ज है। उन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है, जिसकी जांच पश्चिम बंगाल पुलिस कर रही है।

4. क्या महुआ मोइत्रा को गिरफ्तारी का डर है?

कलकत्ता हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को 5 अक्टूबर तक किसी भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी हुई है। हालांकि, शर्त यह है कि उन्हें जांच में पूर्ण सहयोग करना होगा और 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा।

5. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद याचिका का क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख और असहमति को देखते हुए महुआ मोइत्रा के वकील ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अब उन्हें 14 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय और जजों की तल्ख टिप्पणी भारतीय न्यायिक व्यवस्था की उस सोच को दर्शाती है जहाँ कानून की नज़र में सभी समान हैं। महुआ मोइत्रा को भले ही शीर्ष अदालत से व्यक्तिगत पेशी में कोई छूट न मिली हो, लेकिन हाई कोर्ट के सुरक्षा निर्देशों के तहत उन्हें 14 अगस्त को पुलिस के समक्ष पेश होना ही होगा। यह घटनाक्रम दिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में जन-प्रतिनिधियों को न केवल जनता के सवालों बल्कि उनके विरोध का सामना भी लोकतांत्रिक और कानूनी दायरे में रहकर ही करना होता है।

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