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रीवा में पुलिस समन्वय की भारी कमी: 6 साल से अटकी बेटे की पीएम रिपोर्ट, भटकने को मजबूर माता-पिता

Serious lack of police coordination in Rewa

Serious lack of police coordination in Rewa

रीवा: जिले के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बांसा के रहने वाले केमला कोल और उनके परिवार को अपने जवान बेटे की सड़क हादसे में मौत के छह साल बीत जाने के बाद भी न्याय और उसकी पोस्टमार्टम (पीएम) रिपोर्ट पाने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि पीड़ित माता-पिता पुलिस चौकी से लेकर सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय तक दर-दर भटकने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है।

घटना के विवरण के अनुसार, 27 अगस्त 2020 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ओरवा थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना हुई थी, जिसमें निहाल कोल गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजनों ने तुरंत उसे बेहतर इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस मामले में अस्पताल चौकी द्वारा मर्ग कायम किया गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस और रीवा के संजय गांधी पुलिस चौकी के बीच बेहतर समन्वय न बन पाने तथा कागजी व दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण यह पूरा मामला पिछले छह साल से अधर में लटका हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम रिपोर्ट पुलिस जांच, अदालत में चालान पेश करने, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) से मुआवजा पाने के साथ-साथ बीमा क्लेम और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सबसे अनिवार्य दस्तावेज होती है। इस फाइल के अटके होने के कारण केवल इस पीड़ित परिवार को ही नहीं, बल्कि संजय गांधी पुलिस चौकी में लंबित पड़े अन्य बाहरी राज्यों के मामलों का खामियाजा भी आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जिससे पुलिसिया कार्यप्रणाली और विभागों के बीच आपसी तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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