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रीवा टीआरएस में हुआ सेमिनार, विषेशज्ञों न दी ऐसी जानकारी

रीवा। टी.आर.एस. कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग द्वारा एक सेमीनार का आयोजन किया गया। विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर “सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में सामाजिक न्याय” विषय पर संवाद एवं इंटरएक्टिव सेशन में सामाजिक जानकारी देते हुए युवाओं से आवाहन किया गया कि वे सामाजिक असमानताओं को समझकर तर्कसंगत सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते है। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के निर्देशन में संपन्न हुआ।

छात्रों की भूमिका अंहम

कार्यक्रम के उद्देश्यों पर जानकारी देते हुए प्रो. अखिलेश शुक्ल, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र ने बताया कि सामाजिक न्याय की अवधारणा को समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय केवल अधिकारों की प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समान अवसर, गरिमा और सहभागिता सुनिश्चित करने की सतत प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

युवा पीढ़ी पर बड़ी जिम्मेदारी

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. रचना श्रीवास्तव, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रहीं। अपने विस्तृत व्याख्यान में उन्होंने सामाजिक न्याय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भारतीय संविधान में निहित प्रावधानों तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा, समान अवसर, लैंगिक न्याय, आर्थिक समावेशन और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता ही सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख साधन हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी सामाजिक असमानताओं को समझकर तर्कसंगत सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

एक-एक व्यक्ति तक पहुचे लाभ

विशिष्ट अतिथि डॉ विनोद रस्तोगी विभाग अध्यक्ष समाजशास्त्र शासकीय पीजी महाविद्यालय ने अपने उद्बोधन में सामाजिक न्याय को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के लाभ नहीं पहुँचते, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा है। डॉ. महानन्द द्विवेदी ने भी अपने विचार रखते हुए सामाजिक संरचना में व्याप्त असमानताओं और उनके समाधान में शिक्षा की भूमिका पर बल दिया। कार्यक्रम में डॉ. महानन्द द्विवेदी, डॉ अजीत कुमार सिंह अध्यक्ष समाजशास्त्र शासकीय विवेकानंद पीजी महाविद्यालय मैहर, डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. प्रियंका पांडे, डॉ. निशा सिंह एवं योगेश निगम की सक्रिय सहभागिता रही।

छात्रों ने किया सवाल

छात्रों के साथ आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने लैंगिक समानता, सामाजिक समावेशन और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया गया। यह इंटरएक्टिव सेशन अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निशा सिंह द्वारा किया गया।

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