शासन की विभिन्न योजनाओं के भरोसे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हजारों छात्र-छात्राओं की मुश्किलें इन दिनों लगातार बढ़ती जा रही हैं। बजट के अभाव में रीवा संभाग में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से जुड़ी करीब 7 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि अटक गई है, जिसके चलते विद्यार्थियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
समय पर छात्रवृत्ति का भुगतान न होने से परेशान छात्र सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि छात्र अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, जिससे उच्च शिक्षा विभाग में शिकायतों का बड़ा अंबार लग गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, अकेले संबल योजना के तहत 180 से अधिक और ‘गांव की बेटी’ योजना के तहत 68 से ज्यादा शिकायतें आधिकारिक तौर पर दर्ज कराई जा चुकी हैं। छात्रों की इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए अतिरिक्त संचालक महेंद्रमणि द्विवेदी ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने जल्द से जल्द बजट की व्यवस्था कर छात्रों के खातों में रुकी हुई छात्रवृत्ति राशि का वितरण सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं, ताकि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण बाधित न हो।

