रीवा। शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा के समाजशास्त्र विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय समाज में विविधता में एकता- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता विषय पर वक्ताओं ने खुलकर बात रखी। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय समाज की बहुलतावादी संरचना, शिक्षा नीति की भूमिका तथा सामाजिक समरसता के आयामों पर विद्वानों के बीच गंभीर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना था।
एकता ही हमारी सांस्कृतिक शक्ति है
कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी ने कहा कि भारतीय समाज विविधताओं से समृद्ध है और इन विविधताओं के बीच एकता बनाए रखना ही हमारी सांस्कृतिक शक्ति है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को अधिक समावेशी, मूल्यपरक और समाजोपयोगी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रो. अखिलेश शुक्ल ने बताया संगोष्ठी का उद्देश्य
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. अखिलेश शुक्ल ने संगोष्ठी के उद्देश्य का वाचन करते हुए बताया कि भारतीय समाज में भाषा, धर्म, संस्कृति और परंपराओं की विविधता के बावजूद राष्ट्रीय एकता की भावना सदैव मजबूत रही है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य इन्हीं आयामों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना तथा नई शिक्षा नीति के संदर्भ में सामाजिक समरसता के प्रश्नों पर विचार करना है।
शिक्षा से सामाज में आ रहा बदलाव
मुख्य वक्ता डॉ. आशीष सक्सेना ने अपने की-नोट ऐड्रेस में कहा कि भारत की सामाजिक संरचना बहुलतावादी है, जहाँ विभिन्न समुदाय, भाषाएँ और संस्कृतियाँ मिलकर एक साझा राष्ट्रीय पहचान का निर्माण करती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकता है।
सामाजिक एकता के है केन्द्र
मुख्य अतिथि डॉ. आर. पी. सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं बल्कि सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय मूल्यों के संवाहक भी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को समाज की विविधताओं को समझते हुए समरस समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
आयोजित हुए तीन सत्र
उद्घाटन सत्र के पश्चात संगोष्ठी के द्वितीय अकादमिक सत्र में विशेष वक्ता प्रोफेसर विजय लक्ष्मी प्रयागराज थी। सत्र की अध्यक्षता डा. रचना श्रीवास्तव एवं प्रतिवेदक डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव एवं डॉ. स्वाती शुक्ला थी। इस सत्र में डॉ. अलका मिश्रा, पूजा तिवारी, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी ने शोध पत्र का वाचन किया।
इसके बाद तृतीय अकादमिक सत्र की अध्यक्षता डॉ. महानन्द द्विवेदी तथा प्रतिवेदक डॉ. मनीषा द्विवेदी एवं डॉ. फरजाना बानो थी। इस सत्र में डॉ. सतीष कुमार द्विवेदी, चन्द्रभान सिंह, अयोध्या सिंह, देव कृष्ण तिवारी, वर्षा मोगरे आदि ने शोध पत्र का वाचन किया। इसके साथ ही कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में डॉ. महानन्द द्विवेदी, डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. प्रियंका पांडे, डॉ. निशा सिंह, डॉ. गुंजन सिंह, डॉ. प्रियंका तिवारी एवं योगेश निगम ने सक्रिय सहभागिता करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

