Save HCU: “मुहब्बत की दुकान” का नारा देने वाले राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और उनकी कांग्रेस पार्टी (Congress) एक बार फिर अपने ही बनाए पाखंड के जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। एक तरफ राहुल गांधी खुद को पर्यावरण का मसीहा और पशु प्रेमी बताते नहीं थकते, दूसरी तरफ उनकी पार्टी की तेलंगाना सरकार (Telangana Government) हैदराबाद (HCU Jungle) में जंगल की बेरहमी से कटाई कर रही है। यह सब तब हो रहा है, जब हैदराबाद हाई कोर्ट (Hyderabad High Court Order On HCU Jungle) ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का साफ आदेश दिया था। लेकिन लगता है कि कांग्रेस के लिए “मुहब्बत” सिर्फ भाषणों तक सीमित है, जमीनी हकीकत में यह “बुलडोजर की दुकान” बनकर रह गई है।
जंगल की कटाई और हाई कोर्ट की अवमानना
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Hyderabad Central University) के पास कांचा गाचीबोवली (Gachibowli) इलाके में करीब 400 एकड़ जंगल को साफ करने का काम जोरों पर है। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि कुछ ही दिनों में हरे-भरे जंगल (HCU Bio Diversity) का बड़ा हिस्सा गायब हो चुका है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस कटाई से 600 से ज्यादा प्रजातियों के वन्यजीवों का आवास खतरे में पड़ गया है। हैदराबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में कटाई पर रोक लगाई थी, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक रात के अंधेरे में चुपचाप पेड़ काटे जा रहे हैं। यह न सिर्फ पर्यावरण के खिलाफ अपराध है, बल्कि कोर्ट की अवमानना का भी गंभीर मामला है। सवाल यह है कि राहुल गांधी की “मुहब्बत की दुकान” इस पर चुप क्यों है?
राहुल का दोहरा चेहरा
हाल ही में राहुल गांधी ने गुजरात में समुद्री कोरल खनन को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा था। बड़े भावुक अंदाज में उन्होंने समुद्री जीवन की चिंता जताई और खुद को पर्यावरण का रक्षक साबित करने की कोशिश की। लेकिन हैदराबाद (Save HCU) में उनकी अपनी पार्टी की सरकार मासूम वन्यजीवों के घर उजाड़ रही है। क्या राहुल का पर्यावरण प्रेम सिर्फ उन जगहों तक सीमित है, जहां बीजेपी की सरकार है? क्या तेलंगाना में जंगल कटाई पर उनकी चुप्पी यह नहीं दिखाती कि यह सब सिर्फ सियासी ड्रामा है?
आरोप: विकास के नाम पर वन्यजीवों की बलि
स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कटाई आईटी पार्क और औद्योगिक विकास के नाम पर हो रही है। कुछ का कहना है कि इसके पीछे बड़े कॉरपोरेट हित छिपे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया, उनकी आवाज दबाई गई, और जंगल कटता रहा। राहुल गांधी, जो “भारत जोड़ो यात्रा” में पशुओं के साथ फोटो खिंचवाकर खुद को उनका दोस्त बताते हैं, क्या अब इन बेजुबान प्राणियों के लिए एक शब्द भी बोलेंगे? या फिर यह “मुहब्बत” सिर्फ वोटों तक सीमित है?
पाखंड की पराकाष्ठा
राहुल गांधी (Rahul Gandhi HCU Jungle) बार-बार कहते हैं कि उनकी पार्टी नफरत के खिलाफ मोहब्बत की राजनीति करती है। लेकिन हैदराबाद में जो हो रहा है, वह मोहब्बत नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति क्रूरता है। हाई कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाकर जंगल साफ करना क्या कांग्रेस की “मुहब्बत की दुकान” का असली चेहरा नहीं है? शायद राहुल गांधी को अब नया नारा ढूंढना चाहिए- “जंगल काटो, वोट बटोरो”!
सख्ती और लाठीचार्ज
30 मार्च 2025 को जब छात्रों ने बुलडोजरों को रोकने की कोशिश की, तो साइबराबाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 52 छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से ज्यादातर को बाद में निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। लेकिन अगले दिन, 31 मार्च और 1 अप्रैल को प्रदर्शन तेज होने पर पुलिस ने और सख्ती दिखाई। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। कुछ छात्रों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें जबरन खींचकर गाड़ियों में डाला और अलग-अलग थानों (माधापुर, गाचीबोवली, कोल्लूर) में ले जाया गया।
दो पीएचडी छात्रों पर गंभीर आरोप
विरोध में शामिल दो पीएचडी छात्रों, बी. रोहित कुमार और एरम नवीन कुमार, को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। रिमांड रिपोर्ट में दावा किया गया कि ये छात्र “हथियारों से लैस” थे और पुलिस पर हमला करने की कोशिश कर रहे थे। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे “झूठा आरोप” करार दिया है, उनका कहना है कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने की साजिश है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्रों को निहत्थे देखा जा सकता है, जो इस दावे पर सवाल उठाता है।
कैंपस में भारी पुलिस तैनाती
प्रदर्शन के बाद से यूनिवर्सिटी कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात है। छात्रों का कहना है कि कैंपस के गेटों पर बैरिकेडिंग की गई, जिससे उनकी आवाजाही सीमित हो गई। यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स यूनियन ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन” बताया और अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना है कि पुलिस ने न सिर्फ छात्रों को रोका, बल्कि एकेडमिक स्पेस जैसे स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी घुसकर उत्पात मचाया।
आखिर में सवाल वही है: राहुल जी, गुजरात में कोरल की चिंता और हैदराबाद में जंगल की तबाही- यह दोहरा मापदंड कब तक चलेगा? जनता सब देख रही है, और शायद अगले चुनाव में इसका जवाब भी दे देगी। तब तक, हैदराबाद के जंगल चुपचाप रोते रहेंगे, और राहुल की “मुहब्बत” भाषणों में गूंजती रहेगी।