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MP: 100 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत

Saurabh Sharma Bail: 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार परिवहन विभाग (आरटीओ) के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। अदालत ने माना कि आरोपी पिछले 16 माह से न्यायिक हिरासत में है, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच पूरी कर चालान पेश कर चुका है और ट्रायल पूरा होने में अभी समय लग सकता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत मंजूर कर दी।

Saurabh Sharma Bail: जबलपुर में चर्चित 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में गिरफ्तार परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा (Saurabh Sharma) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी (Justice Ajay Kumar Nirankari) की एकलपीठ ने नियमित जमानत (Regular Bail) मंजूर करते हुए कहा कि जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate-ED) अपनी जांच पूरी कर चुकी है, चालान अदालत में पेश किया जा चुका है और आरोप भी तय हो चुके हैं। ऐसे में लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना उचित है।

पहले दो बार खारिज हो चुकी थी जमानत याचिका

सौरभ शर्मा की ओर से दाखिल नियमित जमानत याचिका इससे पहले दो बार खारिज की जा चुकी थी। इतना ही नहीं, बीमार पत्नी के ऑपरेशन के लिए मांगी गई अंतरिम जमानत (Interim Bail) भी अदालत ने स्वीकार नहीं की थी। इस बार अदालत ने मामले की वर्तमान स्थिति और ट्रायल (Trial) में लगने वाले संभावित समय को ध्यान में रखते हुए राहत प्रदान की।

क्या हैं आरोप?

ईडी के अनुसार सौरभ शर्मा मध्य प्रदेश परिवहन विभाग (Transport Department) में आरक्षक के पद पर कार्यरत था और बाद में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement) ले चुका था। जांच में आरोप लगाया गया कि उसने अपने परिवार, सहयोगियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के नाम पर चल-अचल संपत्तियां (Assets), निवेश (Investments) और वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) किए। एजेंसी का दावा है कि उसने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद शुरू हुई जांच

पूरा मामला 19 दिसंबर 2024 को उस समय सामने आया, जब लोकायुक्त (Lokayukta) ने सौरभ शर्मा से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किए गए। इसी दिन आयकर विभाग (Income Tax Department) ने सह-आरोपी चेतन सिंह गौर (Chetan Singh Gaur) के नाम पर पंजीकृत वाहन से नकदी और सोने की ईंटें भी जब्त की थीं, जिसका इस्तेमाल सौरभ शर्मा द्वारा किए जाने का दावा किया गया।

ईडी ने कब किया था गिरफ्तार?

लोकायुक्त की कार्रवाई के आधार पर ईडी (ED) ने 21 दिसंबर 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। उस समय सौरभ शर्मा पहले से ही लोकायुक्त प्रकरण में न्यायिक हिरासत में था। बाद में 10 फरवरी 2025 को ईडी ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। लोकायुक्त के मामले में समय सीमा के भीतर चालान दाखिल नहीं होने के कारण उसे पहले ही जमानत मिल चुकी थी।

जमानत के पक्ष में क्या दलील दी गई?

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि ईडी की जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन का पूरा मामला दस्तावेजी साक्ष्यों (Documentary Evidence) पर आधारित है। अदालत में करीब तीन हजार पृष्ठों के दस्तावेज प्रस्तुत किए जा चुके हैं। गवाहों (Witnesses) और आरोपियों की संख्या अधिक होने से ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। साथ ही आरोपी पिछले 16 महीने से जेल में है, जबकि इस अपराध में अधिकतम सजा सात वर्ष निर्धारित है।

ईडी ने किया जमानत का विरोध

ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002 (Prevention of Money Laundering Act-PMLA) की धारा 45 (Section 45) के तहत जमानत देने के लिए विशेष कानूनी शर्तें लागू होती हैं। एजेंसी का तर्क था कि आर्थिक अपराध (Economic Offence) गंभीर प्रकृति के होते हैं और आरोपी को रिहा करने से गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ (Evidence Tampering) करने तथा अपराध से अर्जित संपत्तियों को छिपाने या स्थानांतरित करने की आशंका बनी रह सकती है।

हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दी राहत?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच पूरी हो चुकी है, आरोप तय किए जा चुके हैं और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है। साथ ही ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना भी नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सौरभ शर्मा को नियमित जमानत देने का आदेश पारित किया।

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