Satna Hospital HIV Case: मध्य प्रदेश के Satna स्थित Sardar Vallabhbhai Patel District Hospital में थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चों के HIV पॉजिटिव मिलने के मामले ने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट में ब्लड बैंक की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
स्वास्थ्य विभाग की जांच में पाया गया कि अस्पताल के ब्लड बैंक में कई बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया गया।
- ब्लड डोनर्स का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं रखा गया
- कई मामलों में डोनर की जानकारी अधूरी या गायब मिली
- ब्लड टेस्ट किट्स के बैच नंबर और कंपनी डिटेल्स तक दर्ज नहीं किए गए
बिना सही जांच के चढ़ाया गया खून
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले जरूरी जांच प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
- HIV और अन्य संक्रमणों की जांच के लिए उन्नत टेस्ट (ELISA/CLIA) नहीं किए गए
- कई यूनिट्स को सिर्फ रैपिड कार्ड टेस्ट के आधार पर इस्तेमाल कर लिया गया
जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच करीब 17% ब्लड यूनिट्स की जांच केवल रैपिड टेस्ट से की गई, जो शुरुआती संक्रमण पकड़ने में कई बार असफल रहता है।
TTI प्रोटोकॉल की अनदेखी
ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इंफेक्शन (TTI) के तहत हर ब्लड यूनिट की HIV, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C, मलेरिया और सिफलिस के लिए जांच जरूरी होती है।
लेकिन जांच में सामने आया कि इन अनिवार्य मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे बच्चों तक संक्रमित खून पहुंचने का खतरा बढ़ गया।
डोनर्स की स्क्रीनिंग और काउंसलिंग भी नहीं हुई
- डोनर्स से मेडिकल जानकारी लेने वाले फॉर्म अधूरे मिले
- बिना हेल्थ चेकअप और हीमोग्लोबिन जांच के ही खून लिया गया
- रिकॉर्ड में सभी डोनर्स का हीमोग्लोबिन सामान्य दिखाया गया, जो संदिग्ध है
- ब्लड बैंक में काउंसलर की पोस्ट खाली होने से स्क्रीनिंग प्रक्रिया प्रभावित रही
नियमों के खिलाफ जारी किया गया खून
जांच में यह भी सामने आया कि दूसरे अस्पतालों से लिया गया खून भी नियमों का पालन किए बिना जारी किया जा रहा था। ब्लड बैंक के रजिस्टर में कई एंट्री खाली पाई गईं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।
- ब्लड बैंक के पूर्व प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल को सस्पेंड किया गया
- दो लैब टेक्नीशियन के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है
स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और ब्लड बैंक सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर उन बच्चों की सुरक्षा को लेकर, जो पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

