Sardar Sarovar Agreement: सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े करीब तीन दशक पुराने पुनर्वास एवं वित्तीय विवाद का समाधान हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि चार राज्यों के बीच हुए नए समझौते से मध्य प्रदेश पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी और वर्षों से लंबित विवाद का स्थायी समाधान भी सुनिश्चित हुआ है।
Sardar Sarovar Agreement: सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े करीब तीन दशक पुराने पुनर्वास और पुनर्बसाहट व्यय विवाद का समाधान हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी। इस समझौते से मध्य प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय भार काफी कम हो गया है।
मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी में बड़ी कटौती
मुख्यमंत्री ने बताया कि फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल की राय के आधार पर पुनर्वास व्यय में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत निर्धारित की गई थी। इस हिसाब से राज्य को गुजरात को करीब 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। हालांकि चारों राज्यों के बीच हुई सहमति के बाद मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 प्रतिशत कर दी गई है। इसके चलते अब राज्य को केवल 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए बड़ी वित्तीय राहत बताते हुए कहा कि यह फैसला सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करता है।
चारों राज्यों के बीच तय हुई नई हिस्सेदारी
नए समझौते के तहत सरदार सरोवर परियोजना में गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत से घटकर 7.66 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटकर 1.17 प्रतिशत रह गई है। नई व्यवस्था के अनुसार गुजरात को अन्य राज्यों से कुल 553.43 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। सरकार का कहना है कि इससे वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद का स्थायी समाधान निकल आया है।
प्रदेश को बिजली और सिंचाई का बड़ा फायदा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि नर्मदा और सरदार सरोवर परियोजना से उत्पादित कुल बिजली का 57 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलता है। अब तक प्रदेश को लगभग 3,900 करोड़ यूनिट बिजली औसतन 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके अलावा परियोजना के माध्यम से प्रदेश की करीब 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है। नर्मदा का पानी जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर और धार जैसे शहरों के साथ-साथ पीथमपुर, देवास और विक्रम उद्योगपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है।
पीएम मोदी और अमित शाह का जताया आभार
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता केवल पुराने वित्तीय विवाद का समाधान नहीं है, बल्कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने इस सहमति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।

