MP News: विधायक गोपाल भार्गव के बेटे भाजपा नेता अभिषेक भार्गव ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीएमसी में डॉक्टर्स और इलाज में अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किया।
MP News in Hindi: सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में डेढ़ साल की बच्ची की मौत और इलाज में अनियमितताओं को लेकर पूर्व मंत्री और वर्तमान रहली विधायक गोपाल भार्गव के बेटे भाजपा नेता अभिषेक भार्गव ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीएमसी में डॉक्टर्स और इलाज में अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किया। साथ ही मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से शिकायत करने की बात कही है।
उन्होंने लिखा कि कई वर्षों से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने गए मरीजों या उनके परिजनों का हर दूसरे-तीसरे दिन फोन आता है। मरीजों को ऑपरेशन के लिए कई- कई दिनों तक इंतजार कराया जाता है। उन्हे जांच के लिए निजी स्थानों पर भेजा दिया जाता है। जो डॉक्टर मेडिकल कालेज में सेवाएं देने के लिए वेतन ले रहे हैं मेडिकल कालेज से ज्यादा निजी अस्पतालों में समय दे रहे हैं। मेडिकल में शायद ही कोई ऐसा कर्मचारी होगा जो मरीजों और उनके परिजनों से बिना दुत्कारे हुए सभ्यतापूर्ण बात करता हो। नर्सिंग स्टॉफ का व्यवहार तो मरीजों के प्रति ऐसा है कि जैसे मरीज आतंकवादी हों।
भोपाल या निजी अस्पताल में जाने की सलाह
अभिषेक भार्गव ने लिखा कि बीएमसी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स, जूनियर डॉक्टरों का तहलका तो सब जानते ही हैं। जरा सी बात पर मरीज और उनके परिजनों की लात-घूंसे और हॉकी डंडों से पिटाई कर दी जाती है। मेडिकल कालेज प्रबंधन अखबारों मे खबरें छपवाता रहता है कि फलाने डॉक्टर ने अत्यंत जटिल ऑपरेशन को सफलता पूर्वक संपन्न करवा कर मरीज को जीवन दान दिया। सैकड़ों करोड़ों की लागत और सागर जिला वासियों की लाखों आशाओं और उम्मीदों से बना है बुंदेलखंड मेडिकल कालेज।
लेकिन जिलावासियों का दुर्भाग्य है कि सागर में चलने वाले छोटे-मोटे निजी अस्पतालों तक में मस्तिक, हृदय और रीढ़ के जटिल से जटिल ऑपरेशन किए जा रहे हैं। लेकिन हमारा बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज केवल जनरल सर्जरी, हड्डी और महिलाओं की डिलीवरी तक सीमित रह गया है। अब तो ये हाल है कि जब भी क्षेत्र का कोई व्यक्ति मुझसे मेडिकल कालेज में भर्ती होकर व्यवस्थाओं के लिए फोन लगाता है तो मैं उसे तुरंत डिस्चार्ज करा कर या तो भोपाल या फिर सागर के ही अन्य अस्पतालों में भर्ती होने की सलाह देता हूं और इसके लिए उनकी व्यवस्था भी करता हूं।
वीडियो देखकर कांप गई रूह
अभिषेक भार्गव ने लिखा कि “मैं भोपाल में था तब सानौधा ग्राम से एक व्यक्ति का फोन आया। उसने मुझे दर्दनाक हादसे की और चक्काजाम की जानकारी दी। मैंने जिला स्वास्थ अधिकारी और मौके पर मौजूद अनुविभागीय अधिकारी से भी बात कर स्थिति जानने का प्रयास किया। इसके बाद मैंने विधायक प्रदीप लारिया से भी बात की। उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर संभव मदद की जाएगी और जो भी दोषी होगा उस पर कठोट कार्रवाई की जाएगी।”
परिजनों ने मुझे मृत बच्ची की देह का एक वीडियो भेजा। जिसे देख कर मेरी रूह कांप गई। अब मुझे लिखने पर मजबूर होना पड़ा। हम सागर वासियों को मेडिकल कॉलेज के तौर पर वरदान मिला है या भयंकर श्राप? जनप्रतिनिधियों और जनता से मेरा आग्रह है कि मेडिकल कालेज की व्यवस्थाएं सुधारना बहुत जरुरी है। एक तरफ हमारी सरकार तरह-तरह के संसाधन मुहैया करा रही है और जनकल्याणकारी योजना बना कर बेहतर से बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर देकर गरीबों के बेहतर से बेहतर इलाज का प्रबंध कर रही है।
तो वहीं दूसरी ओर जिनके हाथों मेडिकल कालेज को चलाने का जिम्मा सौंपा गया है वह अत्यंत असंवेदनशील है। मैं व्यक्तिगत रूप से प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और चिकित्सा शिक्षा मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुल्क के सामने यह मामला रखूंगा।