विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar On Pakistan) ने शुक्रवार को तमिलनाडु स्थित IIT मद्रास में शास्त्र 2026 कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान पड़ोसी देशों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी अच्छे या कम से कम हानिरहित हो सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे कुछ पड़ोसी चुनौतीपूर्ण हैं। (Shaastra 2026 IIT Madras) जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यदि कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहता है, तो भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा का पूरा हक है। उन्होंने जोर दिया, “हम इस अधिकार का उपयोग कैसे करेंगे, यह पूरी तरह हमारी मर्जी है। कोई बाहरी ताकत हमें निर्देश नहीं दे सकती कि क्या करें या क्या न करें। हम अपनी रक्षा के लिए जरूरी हर कदम उठाएंगे।”
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि दशकों पहले पानी साझेदारी की व्यवस्था पर समझौता हुआ था, लेकिन लंबे समय तक आतंकवाद जारी रहने से अच्छे पड़ोस की भावना खत्म हो जाती है। (Indus Waters Treaty) बांग्लादेश का जिक्र करते हुए जयशंकर ने बताया कि वे हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने ढाका गए थे। उन्होंने कहा, “अच्छे पड़ोसी या कम से कम नुकसान न पहुंचाने वाले पड़ोसी होने पर कोई दिक्कत नहीं। जहां अच्छी पड़ोसी भावना होती है, वहां भारत निवेश करता है, सहायता प्रदान करता है और संसाधन साझा करता है।”
इस कार्यक्रम में IIT मद्रास की वैश्विक विस्तार योजनाओं के तहत कई अंतरराष्ट्रीय समझौते हुए, जिनमें जर्मनी के साथ तीन MoU शामिल हैं। (
विदेश मंत्री की प्रमुख बातें:
- भारत उन चुनिंदा प्राचीन सभ्यताओं में शामिल है जो आज आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में जीवित हैं। भारत को अपनी विरासत और इतिहास की गहरी समझ है।
- भारत ने स्वेच्छा से लोकतंत्र चुना, जिसने इसे वैश्विक विचार बना दिया। भारत की जिम्मेदारी है कि वह अपनी संस्कृति और विचारों को दुनिया के सामने प्रस्तुत करे।
- पश्चिमी देशों से साझेदारी आवश्यक है और इसे सकारात्मक ढंग से किया जा सकता है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से भारत दुनिया को दुश्मन नहीं मानता।
- सीमित संसाधनों के साथ अधिक प्रभाव डालना ही भारतीय विदेश नीति का आधार है। कूटनीति अपनी ताकत, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक संस्थानों का उपयोग करती है।
- कोविड महामारी में वैक्सीन डिप्लोमेसी का भावनात्मक प्रभाव बेहद गहरा था। कई गरीब देशों के लिए भारत की वैक्सीन सहायता जीवनरक्षक साबित हुई, जबकि विकसित देशों ने अतिरिक्त स्टॉक जमा कर लिया था।

