भारत-रूस रक्षा सहयोग (India-Russia Defense Partnership) को नई ऊंचाई देने वाला बड़ा ऐलान हुआ है। रूस के भारत राजदूत डेनिस अलीपोव (Denis Alipov) ने कहा कि रूस भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA Project) प्रोजेक्ट में हर संभव मदद करेगा। साथ ही, रूस ने अपना अत्याधुनिक सुखोई Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट (Su-57 Stealth Fighter) भारत को ऑफर किया है, और अगर डील फाइनल हुई तो इन विमानों का निर्माण भारत की धरती पर ही होगा।
16 अक्टूबर 2025 को एक कार्यक्रम में बोलते हुए अलीपोव ने कहा, “यह प्रस्ताव भारत-रूस के लंबे और भरोसेमंद रक्षा संबंधों का नया अध्याय है। अब यह रिश्ता महज़ खरीद-बिक्री के सौदों तक सीमित नहीं, बल्कि संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और हाई-टेक पार्टनरशिप की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह उस गहरे भरोसे की मिसाल है, जिसने दोनों देशों को न सिर्फ रणनीतिक साझेदार, बल्कि साझे नवाचार (co-innovation) का साझेदार बना दिया है।”
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत जल्द ही रूसी तेल की खरीदारी बंद कर देगा। अलीपोव ने इसे खारिज करते हुए कहा कि रूसी ऊर्जा वैश्विक बाजार में सबसे किफायती विकल्प बनी हुई है। क्या यह ऑफर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा?
भारत-रूस रक्षा सहयोग: 70% हथियार रूसी, AMCA में नया अध्याय
भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध छह दशकों से ज्यादा पुराने हैं, और भारत के लगभग 70% रक्षा उपकरण रूसी मूल के हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) में रूसी हथियारों की प्रभावशीलता साबित हुई। ऐतिहासिक उपलब्धियों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos Missile Joint Production) का संयुक्त निर्माण शामिल है, जिसे अब हाइपरसोनिक मिसाइल में अपग्रेड किया जा रहा है।
अलीपोव ने कहा, “भारत और रूस के बीच सहयोग हमेशा से बहुत अच्छा रहा है। शंघाई सहयोग संगठन के आतंकवाद-रोधी मिशन (SCO Anti-Terror Mission) में भी हमारी भागीदारी अहम है।” दोनों देश अगली पीढ़ी (संभवतः 6ठी पीढ़ी) की तकनीकों में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जिनमें एंटी-ड्रोन सिस्टम्स (Anti-Drone Systems), उन्नत रडार (Advanced Radar) और हमला करने वाले हथियार (Offensive Weapons) शामिल हैं।
