Rupee Slide: भारतीय रुपया हाल ही के कारोबारी सत्र में दबाव में जी रहा है जहां डॉलर के मुकाबले इसकी कमजोरी बढ़ती जा रही है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार विदेशी निवेश में कमी कच्चे तेल की ऊंची कीमत और डॉलर की बढ़ती मांग इसकी प्रमुख कारण है। इसका असर आयात लागत, शेयर बाजार और महंगाई पर देखने को मिल रहा है।
Dollar Demand बढ़ने से बढ़ रहा दबाव
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपए पर इसका दबाव तेज देखा गयाहै। भारत कच्चा तेल इलेक्ट्रॉनिक्स और कहीं इंडस्ट्रीज प्रोडक्शन बड़े पैमाने पर आयात करता है जिनका भुगतान डॉलर में होता है। हाल ही में वैश्विक लेवल पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से भारतीय कंपनियों में डॉलर की खरीद बढ़ती दिखाई दे रही है।
बाजार विशेषकों के अनुसार जब आयात बिल बढ़ जाता है तब डॉलर की मांग ज्यादा होती है और इससे रुपया कमजोर हो जाता है। विदेशी मुद्रा बाजार के आंकड़ों के मुताबिक हाल ही में कारोबारी सत्र में रुपया रिकॉर्ड निचले लेवल के करीब बिजनेस करता दिख रहा था।
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FDI और विदेशी निवेश में असर
Rupee Slide के पीछे एक बड़ा कारण विदेशी निवेश प्रवाह में कमी को बताया जा रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेदक की बिकवाली से भारत के बाजार में पूंजी बाहर जा रहीहै। इससे निवेश करने वाले लोग रुपया को बेचकर डॉलर खरीदने हैं जिसका सीधा असर विनिमय दर पर देखने को मिल रहा है। स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार बीते कुछ सप्ताह में विदेशी निवेश करने वाले लोगों की बिग बाली बढ़ी है बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका का ब्याज दर ऊंचा रहना और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेश करने वाले लोगों सुरक्षित परीसपतियों की और अपना ध्यान दे रहेहैं।
RBI की प्लानिंग पर बाजार की नजर
भारतीय रिजर्व बैंक रुपए की अधिक गिरावट को रोकने के लिए समय-समय पर डॉलर की बिक्री के जरिए हस्तशिप कर देता है। हालांकि निवेशक का मानना है कि केंद्रीय बैंक केवल अधिक उतार चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। ना कि किसी तरह के निचले लेवल को बचाने की बैंकिंग सेक्टर के जानकारों की जानकारी के अनुसार आरबीआई के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। जिससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इसका आम लोगों और कंपनियों पर असर
Rupee Slide का सबसे बड़ा असर आयात आधारित सेक्टर पर देखने को मिलता है। कमजोर रुपया पेट्रोल डीजल इलेक्ट्रॉनिक सामान और विदेशी उत्पादों को महंगा बना सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का भी रिस्क बना रहता है। हालांकि आईटी और एक्सपोर्ट आधारित कंपनियों को इससे कुछ फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि डॉलर में होने वाली कमाई रुपए में बदलने में अधिक मूल्य देतीहै।
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आगे क्या रहेगा इसका आउटलुक
बाजार विश्लेषकों के अनुसार आने वाले सप्ताह में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेश प्रवाह रुपए की दिशा तय कर सकते हैं। अगर वैश्विक बाजार में रिस्क भावना कमजोरी रहती है तो रुपए पर दबाव देखा जा सकता है। यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से है,इसको निवेश की सलाह के रूप में नहींसमझे।

