मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की रहने वाली रूपल ने अपनी कड़ी मेहनत से एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। पहले वकालत की पढ़ाई करने वाली रूपल जायसवाल आईएएस अधिकारी बन गई हैं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा के अपने तीसरे प्रयास में 43वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी यह सफलता देश भर के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आई है।
बचपन का सपना और समाज सेवा का संकल्प
रूपल जायसवाल मूल रूप से मध्य प्रदेश के खंडवा शहर की निवासी हैं। उनके पिता पेशे से एक सिविल इंजीनियर हैं, जिन्होंने हमेशा अपनी बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी। बचपन से ही रूपल का सपना प्रशासनिक सेवा में जाने का था। वह अक्सर अपने आसपास ऐसे लोगों को देखती थीं, जिनके सपने संसाधनों की कमी या अन्य कारणों से टूट जाते थे।
इसी जमीनी हकीकत ने उन्हें भीतर से झकझोरा और समाज के लिए कुछ बड़ा करने की प्रेरणा दी। उन्होंने तय किया कि वह एक दिन जिला कलेक्टर बनेंगी ताकि आम जनता की समस्याओं का सीधा और प्रभावी समाधान कर सकें। उनका मानना था कि व्यवस्था में रहकर ही सबसे बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
वकालत की पढ़ाई और मुंबई की नौकरी
अपने करियर की शुरुआत में रूपल ने कानून के क्षेत्र को चुना। उन्होंने साल 2023 में अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की। इसके तुरंत बाद उन्हें मायानगरी मुंबई में एक अच्छी नौकरी भी मिल गई। हालांकि, कॉर्पोरेट जगत की चमक-दमक और अच्छी सैलरी उन्हें वह मानसिक संतुष्टि नहीं दे सकी, जिसकी उन्हें तलाश थी।
मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच उन्हें बार-बार अपना बचपन का वह सपना याद आता था, जो उन्होंने समाज सेवा के लिए देखा था। कुछ ही समय बाद उन्होंने एक कड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में खुद को झोंक दिया।
असफलता से नहीं मानी हार, जारी रखा संघर्ष
यूपीएससी का सफर कभी भी आसान नहीं होता और रूपल के लिए भी यह चुनौतियों से भरा था। नौकरी छोड़ने वाले साल में ही उन्होंने अपना पहला प्रयास किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों का विश्लेषण किया।
साल 2024 में उन्होंने दोगुनी मेहनत के साथ दूसरा प्रयास किया। इस बार उन्हें ऑल इंडिया में 512वीं रैंक हासिल हुई। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन रूपल का अंतिम लक्ष्य कलेक्टर बनना था। इसलिए, उन्होंने इस रैंक से संतुष्ट होने के बजाय अपनी तैयारी को और धार देने का फैसला किया।
रूपल जायसवाल आईएएस बनने का सफर: तीसरा प्रयास
लगातार दो प्रयासों के अनुभव ने रूपल को परीक्षा के पैटर्न और अपनी रणनीति को समझने में बहुत मदद की। साल 2025 में उन्होंने अपना तीसरा प्रयास किया। इस बार उनकी मेहनत, धैर्य और अनुशासन ने रंग दिखाया।
जब यूपीएससी 2025 के परिणाम घोषित हुए, तो उन्होंने पूरे देश में 43वीं रैंक हासिल कर ली। खास बात यह रही कि इस कठिन परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने किसी बड़े शहर की महंगी ऑफलाइन कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने घर पर ही रहकर प्रतिदिन लगभग 15 घंटे की कड़ी सेल्फ स्टडी की।
यूपीएससी इंटरव्यू में किशोर कुमार पर सवाल
यूपीएससी का व्यक्तित्व परीक्षण (इंटरव्यू) हमेशा उम्मीदवारों की हाजिरजवाबी और उनके स्थानीय ज्ञान को परखता है। रूपल के इंटरव्यू में भी कुछ ऐसा ही हुआ। चूंकि वह खंडवा से आती हैं, इसलिए इंटरव्यू बोर्ड ने उनसे प्रसिद्ध गायक और अभिनेता किशोर कुमार से जुड़े कई रोचक सवाल पूछे।
बोर्ड ने उनसे जानना चाहा कि खंडवा शहर आज भी किशोर कुमार का कितना दीवाना है। इसके अलावा, उनसे यह भी पूछा गया कि क्या शहर में उनकी कोई प्रतिमा स्थापित है। रूपल को संगीत में गहरी रुचि है, इसलिए उन्होंने इन सवालों का जवाब पूरे आत्मविश्वास और सहजता के साथ दिया।
युवाओं के लिए रूपल का खास संदेश
अपनी इस शानदार सफलता के बाद रूपल ने सिविल सेवा की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के दौर में छात्र अक्सर ऑनलाइन कोचिंग और शॉर्टकट के पीछे भागते हैं, जो सही रणनीति नहीं है।
उन्होंने युवाओं को सलाह दी है कि वे अपनी मेहनत, अनुशासन और निरंतरता पर भरोसा रखें। उनके अनुसार, स्वयं पर विश्वास और लगातार किया गया प्रयास ही किसी भी बड़े और असंभव लगने वाले लक्ष्य को हासिल करने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।
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