Ruchi Tiwari DU Attack Video: फेमिनिज़म, नारी का अधिकार, फ्रीडम ऑफ़ स्पीच, प्रेस फ्रीडम और जातिगत हिंसा जैसे भारी भरकम शब्द हवा में उड़ जाते हैं जब किसी सामान्य वर्ग से ताल्लुख रखने वाले लोगों के साथ ऐसी हिंसा हो अंजाम दिया जाता है. सोशल मीडिया में DU से एक वीडियो सामने आया है जहां कई पुरुष एक लड़की को दबोचे हुए हैं, उसे पीट रहे हैं, कुछ लड़कियां भी उसे जकड़ी हुई हैं, उसके कपड़े उतारने की शर्मनाक हरकरत की जा रही है और गला दबाकर जान से मारने की कोशिश भी की जा रही है. ये वीडियो न तो बांग्लादेश का है, न पाकिस्तान का ये भारत के सबसे प्रमुख शैक्षणिक संसथान दिल्ली विश्वविद्यालय का है जहां एक अकेली महिला के साथ ऐसी शर्मनाक घटना को अंजाम दिया गया.
इन सो काल्ड स्टूडेंट्स द्वारा जकड़ी गई इस महिला का नाम रुचि तिवारी (Ruchi Tiwari DU) है, रूचि तिवारी पत्रकार हैं और 13 फरवरी को उस आंदोलन को कवर करने DU के नार्थ कैम्पस में चली गई थीं जहां UGC के जाति आधारित नियमों के समर्थन में प्रदर्शन हो रहा था। आरोप है कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों को पता चल गया कि इस पत्रकार का सरनेम तिवारी है. बस फिर क्या भीड़ उग्र हो गई, रूचि तिवारी ने बताया कि इस दौरान, नारे लगाए जाने लगे कि ‘यह ब्राह्मण है इसे पकड़ो, इसे मारो, हद तो तब हो गई जब भीड़ में से आवाज आई ‘यहाँ कोई कुछ बोलना मत, वरना काट कर फेंक देंगे।’
एक अकेली महिला पत्रकार को 100 से 150 लोग घेरे खड़े थे, कोई उसे गलत तरीके से छू रहा था, कोई उसके कपड़े उतारने की कोशिश कर रहा था और कोई उसका गला दबा रहा था. लोग पीछे से चिल्ला रहे थे इसके कपड़े उतार दो. और सबसे दुखद बात ये है कि इस पूरी हिंसक घटना में कई लड़कियां भी शामिल थीं जो वीडियो में देखी जा सकती हैं.
रूचि तिवारी ने जैसे तैसे इन वामपंथियों से अपनी जान छुड़ाई। और अपने साथ हुई घटना की जानकारी सोशल मीडिया में शेयर की
ANI को इंटरव्यू देते हुए रूचि ने ये भी बताया कि जो लड़कियां उसे पड़की हुई थीं वो कह रही थी आज तुमने निवस्त्र करके तुम्हारी परेड निकालेंगे
रुचि की मानें तो DU कैम्पस में एक महिला, एक पत्रकार को सिर्फ इस लिए टारगेट किया गया कि वे सामान्य वर्ग की थी. और कई लोगों को यह घटना सामान्य ही लग रही है। खैर ये पूरा विवाद UGC रेगुलेशन को लेकर है. UGC ने हाल ही में कैम्पस में जातिगत भेदभाव रोकने के नाम पर ऐसे नियम लागू कर दिए थे जो सामान्य वर्ग के छात्रों को एक तरफा लगे. उनका कहना है कि नए नियमों में उनके साथ होने वाले जातिगत भेदभाव और हिंसा पर कार्रवाई का कोई प्रावधान ही नहीं है और न ही फर्जी आरोप लगाने वाले लोगों के खिलाफ एक्शन लेने की बात लिखी गई है. मामला सुप्रीम कोर्ट गया जहां 29 जनवरी को कोर्ट ने इस नियम पर रोक लगा दी और इसी रोक के विरोध में SFI और AISA जैसे संगठन विरोध करने लगे. और इन विरोध प्रदर्शन में ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया.
सोशल मीडिया में लोग दो गुटों में बंट गए हैं कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि रूचि ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हमला किया, उनसे भड़काऊ सवाल पूछे जबकि उनका सपोर्ट कर रहे लोगों का कहना है कि को सिर्फ उसकी जाति देखकर टारगेट किया गया.

