Mohan Bhagwat On Castism : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज में गहराई तक पैठी जातिगत भेदभाव की समस्या पर कड़ा प्रहार किया है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक जन संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक समरसता के लिए केवल बाहरी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जातिवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए इसे व्यक्तिगत और मानसिक स्तर पर त्यागना होगा।
प्राचीन काल में जाति का संबंध कर्म से था। Mohan Bhagwat On Castism
संगोष्ठी के दौरान जनता से सीधा संवाद करते हुए भागवत ने कहा कि प्राचीन काल में जाति का मुख्य संबंध व्यक्ति के पेशे और कर्म से था। हालांकि, समय के साथ इस व्यवस्था ने समाज में ऐसी पैठ बना ली कि यह ऊंच-नीच और भेदभाव का मुख्य कारण बन गई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में यह विभाजन राष्ट्र की प्रगति में बाधक है।
अपने मन से निकालना होगा जातिवाद का ज्वर | Mohan Bhagwat On Castism
मोहन भागवत ने समाज से एक भावुक और व्यावहारिक अपील करते हुए कहा, यदि हम ईमानदारी से जाति को अपने मन से निकाल दें और इसे व्यवहार में लाएं, तो अगले 10 से 12 वर्षों के भीतर भारत से जातिवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।” उन्होंने रेखांकित किया कि भेदभाव का अंत केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण के शुद्धिकरण से संभव है।
राष्ट्र निर्माण संघ का प्राथमिक लक्ष्य : भागवत
कार्यक्रम में प्रांत संघचालक अनिल भालेराव की उपस्थिति में भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली पर भी प्रकाश डाला। राष्ट्र निर्माण को संघ का प्राथमिक लक्ष्य भारत को उसके खोए हुए गौरव तक पहुँचाना है। चरित्र निर्माण को को परिभाषित करते हुए कहा कि राष्ट्र का उत्थान तभी संभव है जब नागरिकों का व्यक्तिगत चरित्र मजबूत हो। संघ किसी संस्था से प्रतिस्पर्धा नहीं करता और न ही यह किसी के विरुद्ध प्रतिक्रिया स्वरूप बना है। संघ का ध्येय खुद को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज को सशक्त और संगठित बनाना है।
