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RSS Chief Mohan Bhagwat : भाजपा के चुनावी एजेंडे से अलग हटकर भागवत बोले – ‘हिंदू राष्ट्र का सत्ता से लेना-देना नहीं’

RSS Chief Mohan Bhagwat

RSS Chief Mohan Bhagwat : जब-जब देश में हिन्दू राजनीति की बात आती है तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जरूर जुड़ता है। इन दिनों हिंदूवादी सोच देश में एक अलग ही विवाद उतपन्न कर रही है। भारतीय जनता पार्टी हिन्दू मुद्दों को बड़ी प्रमुखता उठा रही है। बीजेपी सरकार पर विपक्ष बार-बार आरोप लगा रहा है कि वह हिंदूवादी विचारधारा का इस्तेमाल सत्ता पाने और टिके रहने के लिए कर रही है। इस बीच आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत का मंगलवार को दिया गया भाषण खास हो जाता है। भागवत कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र का मतलब सत्ता से नहीं है।

हिंदू राष्ट्र का मतलब सत्ता से नहीं : मोहन भागवत 

ऐसा माना जाता है कि आरएसएस संघ बीजेपी को समय-समय पर विचारधारा देती है। कई मतभेदों के बावजूद आरएसएस और बीजेपी हमेशा हिंदूवादी सोच पर एक हो जाते हैं। लेकिन संघ प्रमुख मोहन भागवत का यह कहना है कि हिंदू राष्ट्र का मतलब सत्ता से नहीं है, एक तरह का संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि संघ अब बीजेपी को हिंदू राष्ट्र के मुद्दे को थोड़ा नरम होकर चलने का संकेत देना चाहता है।

RSS के हिन्दू राष्ट्र विचारधारा पर विपक्ष का सवाल 

बता दें कि मोहन भागवत का यह ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष बीजेपी पर यह आरोप लगा रहा है कि वह बहुसंख्यकवाद और अलगाव को बढ़ावा दे रही है। बीजेपी लगातार दूसरी बार केंद्र में है और कई राज्यों में भी ताकत रखती है। विपक्ष का कहना है कि संघ अपनी स्थापना के शुरुआती दिनों से ही हिंदू राष्ट्र की बात कहता रहा है।

हिंदू सिर्फ धर्म नहीं : मोहन भागवत

आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि गुरुजी गोलवलकर ने कहा था कि भारत की आत्मा हिंदू है और यहाँ की संस्कृति की जड़ें हिंदुत्व से हैं। संघ का मानना है कि हिंदू सिर्फ धर्म नहीं है, बल्कि संस्कृति, परंपरा, जीवनशैली और समाज के मूल भी हैं। इसलिए संघ हमेशा कहता रहा कि मुसलमान, ईसाई, पारसी या दूसरे धार्मिक समूह भी इस देश का हिस्सा हैं, जितने हिंदू हैं। संघ अपनी पुरानी बात पर ही खड़ा है।

हिंदू राष्ट्र का मकसद संसद में बहुमत पाना नहीं 

संघ प्रमुख मोहन भागवत का यह कहना है कि संघ पुरानी सोच को ही दोहराता है। चूंकि संघ सीधे सत्ता में नहीं है, उसकी ताकत समाज-निर्माण, शिक्षा, सेवा और संस्कृति के कामों में है। भागवत का यह कहना कि हिंदू राष्ट्र का मकसद संसद में बहुमत पाना नहीं है, बल्कि समाज में नैतिकता, एकता और सांस्कृतिक मेलजोल बनाना है। हाँ, लेकिन इस बात का समय भी खास है। यह हो सकता है कि संघ प्रमुख बीजेपी को कोई सीमा तय कर रहे हों या अल्पसंख्यकों को संदेश देना चाहते हों।

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