गुजरात में इस मानसून Chandipura Virus के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है राज्य में अब तक 22 बच्चों कीमौत हो चुकी है जबकि अन्य कई बच्चों का इलाज अभी हो रहा है। यह वाइरस मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न मिलने पर एक गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
गुजरात में क्या है इसका पूरा मामला?
सरकार के अनुसार मानसून सीजन के दौरान चांदी पुरा वायरस के कई मामले देखने को मिले हैं इनमें से 35 मामलों की lab टेस्ट में पुष्टि हुई है और अब तक 22 बच्चों की इस वायरस से मौत हो चुकी है। जबकि 7 बच्चों को हॉस्पिटल में इलाज के लिए रखा गया है। डॉक्टर लगातार नए मामलों पर निगरानी कर रहे हैं और प्रभावित जिलों पर सर्विलांस को बढ़ा दिया गया है।
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ये Chandipura Virus क्या है और कैसे फैलता है?
चांदीपुर वायरस एक वायरस संक्रमण होता है जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई नामक छोटे कीट के काटने से फैलता है। डॉक्टर के अनुसार यह वाइरस इंसान से इंसान में फैलने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। यह संक्रमण खास तौर पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादातर प्रभावित कर रहा है। बारिश के मौसम में कीटों की संख्या होने से वायरस का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
आखिर बच्चों में कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं?
चांदीपुरा वायरस की शुरुआत तेज बुखार सिर दर्द और उल्टी जैसे लक्षण से होती है उसे मामलों में कुछ ही घंटे के भीतर मरीज की स्थिति भी गंभीर हो सकती है। दौरे पढ़ना, बेहोशी की स्थिति और दिमाग में सूजन इसके गंभीर लक्षण होते हैं। डॉक्टर का कहता है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है क्योंकि शुरुआती इलाज से मरीज की जांच बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
इलाज और बचाव के लिए क्या सलाह है?
Chandipura Virus के लिए कोई विशेष एंटीवायरस दवाइयां वैक्सीन उपलब्ध नहीं है मरीजों का इलाज उनके स्थिति के अनुसार सपोर्टिव केयर आईसीयू निगरानी और जरूरी दवाइयां के जरिए किया जा रहा है। डॉक्टर ने लोगों से सलाह दी है कि वह बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहना है और घर के आस-पास साफ सफाई बनाए रखें। जिससे मच्छरों का खतरा काफी हद तक कम हो।
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इसपर सरकार ने क्या कदम उठाए?
गुजरात सरकार ने सभी सरकारी और नीचे हॉस्पिटल को सैंडिक्त मरीज का तुरंत इलाज करने के निर्देश दे दिए हैं इसके साथ ही केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों के राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया थी को गुजरात और राजस्थान भेज दिया है। यह टीम संक्रमण की निगरानी जांच और रोकथाम के उपाय को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।

