रीवा: पीपीपी मॉडल के तहत करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश हाउसिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (MPHIDB) द्वारा तैयार किया गया रीवा कलेक्ट्रेट भवन महज छह साल के भीतर ही गंभीर बदहाली का शिकार हो गया है। प्रशासनिक मुख्यालय की इस नई इमारत के रखरखाव और निर्माण की पोल खुलने लगी है।

भवन के कई प्रमुख हिस्सों में प्लास्टर उखड़ने लगा है, तो वहीं पिलरों में लगातार पानी के सीपेज (रिसाव) के चलते भारी नमी बनी हुई है। इस निरंतर रिसाव के कारण दीवारों और अन्य संरचनात्मक हिस्सों में जगह-जगह दरारें आ चुकी हैं। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि पानी से प्रभावित इन हिस्सों में अब हरी झाड़ियां तक उग आई हैं।

एक तरफ जहां सरकार स्वच्छता और सार्वजनिक परिसरों के रख-रखाव पर विशेष जोर दे रही है, वहीं जिले के मुख्य प्रशासनिक भवन की यह दयनीय स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता, इसकी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते इस तकनीकी खामी की जांच करवाकर ठोस मरम्मत कार्य नहीं कराया गया, तो यह समस्या प्रशासनिक कामकाज और भवन की सुरक्षा दोनों के लिए और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।




