रीवा। ठाकुर रणमत सिंह स्वशासी महाविद्यालय, रीवा के समाजशास्त्र विभाग द्वारा सामाजिक सर्वेक्षण की अवधारणा एवं फील्डवर्क की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. रचना श्रीवास्तव, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रीवा रही। संगोष्ठी का संयोजन समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश शुक्ल द्वारा किया गया। उन्होंने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक सर्वेक्षण समाज की वास्तविक धड़कन को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम है। सामाजिक सर्वेक्षण मात्र आंकड़ों के संकलन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संरचना, समस्याओं, आवश्यकताओं और परिवर्तनशील सामाजिक प्रवृत्तियों को समझने का एक वैज्ञानिक और विश्वसनीय उपकरण है।
सटीक सर्वेक्षण और सशक्त फील्डवर्क अनुसंधान की आधारशिला
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रचना श्रीवास्तव ने कहा कि फील्डवर्क न केवल सामाजिक जीवन की जटिलताओं को समझने में सहायक होता है, बल्कि शोध की नैतिकता और उत्तरदायित्व के दृष्टिकोण को भी मजबूत करता है। डेटा तभी सार्थक होता है, जब वह निष्पक्ष अवलोकन, संवेदनशील संवाद और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हो। सटीक सर्वेक्षण और सशक्त फील्डवर्क मिलकर विश्वसनीय सामाजिक अनुसंधान की आधारशिला तैयार करते हैं।
इन्होने दी जानकारी
डॉ. महानन्द द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि फील्डवर्क सामाजिक यथार्थ को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से जानने का सर्वाेत्तम तरीका है। फील्डवर्क शोधार्थी को पुस्तकालय की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज के जीवंत अनुभवों से जोड़ता है। इस अवसर पर संकाय सदस्य डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. प्रियंका पांडे, डॉ. निशा सिंह और योगेश निगम ने सक्रिय सहभागिता दर्ज की। संगोष्ठी में छात्र संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।
- Facebook: shabdsanchi
- Instagram: shabdsanchiofficial
- YouTube: @ShabdSanchi
- Twitter: shabdsanchi
