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रीवा महापौर के बिगड़े बोल, निगमकर्मी को दी ‘नाली में घुसेड़ने’ की धमकी, वायरल वीडियो ने गरमाया सियासी पारा

Rewa mayor threatens employee during inspectionRewa mayor threatens employee during inspection

Rewa mayor threatens employee during inspection

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा नगर निगम के महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ एक बार फिर चर्चाओं में हैं, लेकिन इस बार वजह विकास कार्य नहीं बल्कि उनका एक विवादित बयान है। शहर के वार्ड नंबर 16 में गंदे पानी की समस्या का निरीक्षण करने पहुंचे महापौर का एक वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें वे एक निगम कर्मचारी को फोन पर भद्दी गालियां और धमकी देते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद शहर का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है।

निरीक्षण के दौरान खोया आपा
दरअसल, गुरुवार को वार्ड नंबर 16 के रहवासियों ने महापौर से दूषित पानी की शिकायत की थी। जब महापौर मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि नाली के बिल्कुल बगल में बोरवेल कराया गया है, जिससे गंदा पानी पीने की पाइपलाइन में मिल रहा था। इस भारी लापरवाही को देख महापौर बिफर पड़े और उन्होंने तत्काल संबंधित निगम कर्मचारी को फोन लगाया। फोन पर बातचीत के दौरान महापौर इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने सारी मर्यादाएं लांघ दीं। उन्होंने कर्मचारी से कहा, “ऐसा है कि आ जाओ तो तुमको उसी नाली में घुसेड़ दूंगा, शर्म नहीं लगती तेरे को… दलाली करते बैठा रहता है, ए मुरारी इसको हटाओ साले को।”

भाजपा ने बताया अनुसूचित जाति का अपमान
महापौर के इस आक्रामक और अभद्र लहजे पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीनानाथ वर्मा ने इसे सीधे तौर पर अनुसूचित जाति (SC) समाज का अपमान करार दिया है। उन्होंने कहा कि एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफाई कर्मियों के पैर धोकर उनका सम्मान करते हैं, वहीं कांग्रेस के महापौर उन्हें अपमानित कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि महापौर अपने चार साल के कार्यकाल में पहली बार एसी चेंबर से बाहर निकले थे और बाहर आते ही उन्होंने अपना अहंकार दिखा दिया।

कार्रवाई के निर्देश, पर व्यवहार पर सवाल
हालांकि, निरीक्षण के दौरान महापौर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर 15 से 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाने और अवैध अतिक्रमण पर जेसीबी चलाने की बात कही। लेकिन, उनके इस व्यवहार ने जनता के बीच नई बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि समस्या का समाधान होना जरूरी है, लेकिन एक जनप्रतिनिधि को इस तरह की असंसदीय भाषा का उपयोग शोभा नहीं देता। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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