रीवा। कहते है प्रतिभा किसी परिचय का मोहताज नही होती। कुछ ऐसा की कर दिखाया रीवा जिले की जवा तहसील के गांव पुरौना निवासी सौरभ द्विवेदी ने। रीवा के मार्तण्ड स्कूल में पढ़ने वाला यह युवा होनहार आज देश की सबसे बड़ी संस्था इसरों में वैज्ञानिक बन गया है। सौरभ अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र में देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों में योगदान देंगे। उनकी इस उपलब्धी से रीवा जिला समेत पुरैना गांव गौरवान्वित है।
मार्तण्ड स्कूल से शुरू हुई थी शिक्षा
सौरभ की शुरुआती पढ़ाई शासकीय मार्तण्ड उत्कृष्ट क्रमांक-एक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने भोपाल से बीटेक और देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी दिल्ली से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद वे अपने लक्ष्य पर अटल रहे और आज उस मुकाम को हॉसिल कर लिए है जिसके लिए वे कड़ी मेहनत कर रहे थें।
चंद्रयान से हुए प्रभावित
पढ़ाई के दौरान सौरभ चंद्रयान-दो के प्रक्षेपण को देखा। जिससे वे बहुत ही प्रभावित हुए और उन्होंने तय किया कि एक दिन वे भी देश के अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बनेंगे जिसके लिए वे पूरी तैयारी के साथ अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगे रहे। जिसका परिणाम रहा कि उन्हे सफलता हाथ लगी। सौरभ के पिता शैलेन्द्र द्विवेदी टीर्चर हैं और शिक्षा कितनी जरूरी है, इसका ज्ञान उन्हे अपने टीर्चर पिता से मिला तो वहीं मां गीता द्विवेदी उनके हौसलों को बढ़ाते हुए लक्ष्य प्राप्ती में पूरा योगदार दी। सौरभ द्विवेदी के इस सफलता की जानकारी मीडिया को देते हुए पूरा परिवार खुश है तो गांव के लोग भी होनहार इस युवा की मेहनत के मुरीद है।

