रीवा। रीवा मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक और अनूठा शहर है, जो मुख्य रूप से विश्व की पहली सफेद बाघ सफारी (मुकुंदपुर), बघेल राजाओं की गौरवशाली विरासत, रेवा (नर्मदा) नदी के नाम पर नामकरण, और महामृत्युंजय मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह विंध्य क्षेत्र का सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र है, जिसे झीलों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। रीवा के अनूठे होने के प्रमुख कारण है।
सफेद बाघ की धरती
रीवा दुनिया में सफेद बाघों का पहला घर है। यहां का मोहन बाघ जो अपनी मोहनी छवि के रूप में पहली बार इस धरती पर देखा गया। आज दुनिया भर में अगर कही सफेद बाघ है तो वे रीवा राज्य के सफेद बाघ मोहन के वंशज है। कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने रीवा और मैहर जिले की सीमा क्षेत्र मुकुंदपुर में ओपन व्हाइट-टाइगर सफारी का निर्माण कराया। इसमें सफेद बाघ खुले में विचरण करते हुए देखे जाते है और पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

नर्मदा के नाम से बना रेवा
मध्य प्रदेश के रीवा का नाम नर्मदा नदी के पौराणिक और प्राचीन नाम ’रेवा’ पर पड़ा है, क्योकि नर्मदा को ही रेवा कहा जाता है, वह अपने पथरीले तल से उछलती हुई बहती है। रीवा नगर का विकास और नामकरण रेवा नदी (नर्मदा) जो प्राचीन काल से इस क्षेत्र का एक प्रमुख भौगोलिक और सांस्कृतिक हिस्सा रही है।
संगीत, कला और शिक्षा को महत्वं
रीवा रियासत ने संगीत, कला और शिक्षा को बढ़ावा दिया। यहां का किला और संस्कृति आज भी जीवंत है। सांस्कृतिक एवं संगीतमय विरासत बघेलखण्ड शास्त्रीय संगीत का केंद्र रहा है, जहाँ उस्ताद मो. खाँ, मृदंग सम्राट कोदऊ सिंह जैसे ख्याति प्राप्त संगीतज्ञों को राज्याश्रय मिला। महाराज रघुराज सिंह ने गोविंदगढ़ महल, लक्ष्मण मंदिर और रीवा में कई भव्य निर्माण करवाए। महाराजा भाव सिंह और रघुराज सिंह स्वयं संस्कृत और फारसी के विद्वान थे, जिन्होंने ग्रंथों की रचना की। रीवा रियासत ने शिक्षा को बढ़ावा दिया, जिसका जीवंत उदाहरण अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय जैसे संस्थान हैं, जो आज भी क्षेत्र में शिक्षा की लौ जलाए हुए हैं। इसका गौरवशाली इतिहास रहा कि 1947 में रीवा रियासत स्वेच्छा से भारतीय संघ में शामिल हुई।

अनोखा महामृत्युंजय मंदिर
रीवा का महामृत्युंजय शिव मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है, जहां भक्तों की अटूट आस्था है। महामृत्युंजय शिव मंदिर (किला परिसर) 600 वर्ष से अधिक पुराना है और अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण देश भर में प्रसिद्ध है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहाँ स्थापित स्वयंभू शिवलिंग में 1001 (सहस्त्र) सूक्ष्म छिद्र (नेत्र) हैं, जिन्हें भगवान शिव की दिव्य आंखें माना जाता है। सैंड स्टोन से बना यह शिवलिंग अद्भुत है, जिस पर जलाभिषेक करने से भक्तों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि और सावन के पावन अवसरों पर यहाँ महादेव की पूजा करने से असाध्य रोगों और कष्टों का नाश होता है। मान्यता के अनुसार, बघेल रियासत के महाराजा विक्रमादित्य को शिकार के दौरान इस स्थान पर अलौकिक शक्ति का अनुभव हुआ, जिसके बाद यहाँ मंदिर की स्थापना की गई।यहाँ नित्य पूजा के साथ-साथ महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और बसंत पंचमी पर विशेष आयोजन होते हैं, जहाँ हजारों भक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता
रीवा के आसपास के घने जंगल और प्राकृतिक दृश्य इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल बनाते हैं।रीवा, मध्य प्रदेश का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो अपने घने जंगलों, लुभावने वाटरफॉल (जलप्रपात) और ऐतिहासिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के मुख्य आकर्षण बहुती, क्योटी, और पूर्वा वाटरफॉल के साथ ही मुकुंदपुर टाइगर सफारी, रीवा फोर्ट और गोविंदगढ़ पैलेस हैं। यह विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा मिश्रण प्रदान करता है।
